A+ A A- A A A Login |    Archaeology |    Act |   Contact Us |   Tender |   Circular |   TDS Certificate
Contact no: 0771-2537404
image description
CHHATTISGARHI VYANJAN

मानव सभ्यता जितनी पुरानी है लगभग उतना ही पुराना है- स्वाद का संसार । सभ्यता के विकास के साथ स्वाद की दुनिया बदलती चली गई । सहज सुलभ कलेवा होता हुआ खानपान का यह रुप आज नये दौर में है, षट्-रस तो वही हैं लेकिन जिनमें प्रपंच स्वाद से कम नहीं । मध्य भारत के पांच अहम् लोकांचल हैं, बुंदेलखण्ड, बघेलखण्ड, निमाड़, मालवा और हमारा अपना छत्तीसगढ़ । अपनी-अपनी रस विशिष्टता के साथ । ऐसे में हमें याद आती हैं हमारी परंपराएं इस मामले में छत्तीसगढ़ संभवतः सबसे अनूठा है ।

अन्य राज्यो की तरह छत्तीसगढ़ में भी खान-पान की विशिष्ट और दुर्लभ परंपराएं है। आदिवासी समाज में प्रचलित 'वनोपज' से लेकर जनपदीय संस्कृति तक 'कलेवा' अपना रुप बदलता है.पारंपरिक व्यंजन सिर्फ उत्सव-त्यौहार में स्वाद बदलने का जरिया मात्र नही, वे हमें हमारी विरासत से भी परिचित कराते है। समय के साथ 'स्वाद का सहज संसार' भी बदलता गया है। आधुनिकहोते परिवेश में नई पीढ़ी के अपने सांस्कृतिक मूल्यों से परिचय कराना हमारे बस में है. निःसंदेह देश के दूसरे लोकांचलों के मुकाबले छत्तीसगढ़ स्वाद के मामले मे बेजोड़ है। यहाँ मागंलिक अथवा गैर मांगलिक दोनों अवसरों पर घरों में एक से एक व्यंजनों का चलन है। नमकीन, मीठे, व्यंजनों की इन श्रृंखला में भुने हुए, भाप में पकाए और तले प्रकार तो है, और इनसे अलग हटकर भी व्यंजन बनाने की रिवाज है। इन खाद्य पदार्थो में उन्ही वस्तुओं का इस्तेमाल होता है जिनकी जरुरत रोजमर्रा की रसोई में हम किया करते है। जैसे आटा, ज्वार, चना, तिल, जौ, चावल, चोकर, गुड़, गोंद आदि। ये मिठाईयाँ न तो किसी सांचे से ढ़लती है और न ओवन के गणितीय तापमान से इनका नाता है। चकमकी और रंगीन आभा वाली बाजारु मिठाईयाँ के सामने ये मिठाईयाँ खासी विनम्र और सादगी युक्त तो है, पौष्टिकता के मुकाबले मे भी इनका जवाब नही। ममत्व और श्रम सींच-सींच कर बनाई गई इन घरेलू मिठाईयों का एक मर्तबा स्वाद लीजिए ।

आइए नजर डालें छत्तीसगढ़ी स्वाद की इस झांपी में जहां फरा, पीठिया, छिटहा लाडू, मुठिया, चौंसेला, अइरसा, देहरौरी, चीला, सोंहारी, पपची, ठेठरी, खुरमी सहित और भी बहुत कुछ गुण-ग्राहकों की प्रतीक्षा में है ।

image description
लम्बी या गोल आकृति वाला यह नमकीन व्यंजन बेसन से बनता है ।
image description
बेसन का मोटा सेव है, इसे नमक डालकर नमकीन करी (सेव) बनाते हैं तथा बिना नमक के करी से गुड़ वाला मीठा लड्डू बनता है। दुःख-सुख के अवसरों में करी का गुरहा लड्डू बनाया जाता है ।
image description
शादि-ब्याह और भोज में पतली और बड़ी पूरी-सोहारी बनायी जाती है ।
image description
उड़द दाल से बने इस व्यंजन का शादि-ब्याह तथा पितर में विशेष चलन है ।
image description
छत्तीसगढ़ी तसमई खीर जैसा व्यंजन है। दूध, चांवल का यह पकवान गर्मी-खुशी में विशेष तौर पर बनता है ।
image description
गेहूं तथा चावल के आटे के मिश्रण से निर्मित मीठी प्रकृति का लोकप्रिय व्यंजन है। गुड़ चिरौंजी और नारियल इसका स्वाद बढ़ा देते हैं ।
image description
गेहूं-चावल के आटे से बनी पपची बालूशाही को भी मात कर सकती है । मीठी पपची मंद आंच में सेके जाने से कुरमुरी और स्वादिष्ट बन जाती है ।
image description
अइरसा चावल आटा और गुड़ की चाशनी से बना छत्तीसगढ़ी पकवानों का स्वादिष्ट रुप माना जाता है ।
image description
दरदरे चावल से बनी देहरौरी अपनी अलग पहचान रखती है। चासनी में भींगी देहरौरी को रसगुल्ले का देसी रुप कह सकते हैं ।
image description
फरा दो तरह से मीठा बनता है - पहला मीठा ,जिसमे फरा में गुड़ का घोल प्रयुक्त होता है और दूसरा भाप में पकाया हुआ जिसको बघार लगाकर अधिक स्वादिष्ट किया जाता है ।
image description
हरेली, पोरा, छेरछेरा त्यौहारों में विशेष रुप से तलकर तैयार किया जाने वाले यह चावल के आटे से बनाया जाता है और गुड़ व आचार व्यंजन का जायका बढ़ा देते हैं ।
image description
चीले के दो रुप प्रचलन मे है-मीठा एवं नमकीन । चावल के आटे में नमक डालने से नुनहा चीला बनता है एवं घोल में गुड़ डाल देने से गुरहा चीला। इन दोनों चीले का स्वाद हरी मिर्च और पताल की चटनी से बढ़ जाता है ।
image description
उड़द की पीठी या बेसन दोनों से भजिया बनाने का रिवाज है। पत्तल में परोसने का यह आवश्यक आहार है

छत्तीसगढ़ी व्यंजन संतुलित, स्वास्थ्यवर्धक और स्वादिष्ट होते हैं । साथ ही पारंपरिकता की सौंधी महक इनको बेजोड़ बनाती है । आधुनिकता के इस दौर में चूल्हा-चौके से निकले स्वाद के अपने और विनम्र संसार में उतरने का अवसर दे रहा है नाचा वाला खाइ-खजेना ।