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संस्कृति विभाग
छत्तीसगढ़ शासन
संस्कृति विभाग
वार्षिक प्रशासकीय प्रतिवेदन 2008 - 2009


विभाग का नाम संस्कृति विभाग
मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल
संसदीय सचिव श्री युद्धवीर सिंह जूदेव
सचिव श्री सुब्रत साहू
उपसचिव डॉ. तपेशचन्द्र गुप्ता
अवर सचिव श्री एन.डी. भोयर
संचालनालय
आयुक्त श्री राजीवचन्द्र श्रीवास्तव
संयुक्त संचालक डॉ. तपेशचन्द्र गुप्ता
उप संचालक श्री राहुल कुमार सिंह
श्री एस.बी. सतपाल
श्री एस.एस.सी. केरकेट्टा
श्री जे.आर. भगत
विभाग के अधीनस्थ गठित इकाईयां
छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग
अध्यक्ष श्री श्यामलाल चतुर्वेदी
सचिव पद्मश्री डॉ. सुरेन्द्र दुबे
सदस्य डॉ. रमेन्द्रनाथ मिश्र
श्री केदार सिंह परिहार
पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी सृजन पीठ
अध्यक्ष श्री बबन प्रसाद मिश्र
छत्तीसगढ़ सिंधी साहित्य संस्थान
अध्यक्ष श्री मुरलीधर माखीजा
उपाध्यक्ष श्री प्रहलाद राय मुसाफिर
सचिव डॉ. एम.आर. थधानी

संचालनालय संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग,रायपुर के विभागाध्यक्ष तथा मैदानी कार्यालयों की स्वीकृत संरचना 2009-10

सं.क्र.

नाम वेतनमान स्वीकृत भरे रिक्त
1 2 3 4 5 6
1 आयुक्त अखिल भारतीय सेवा से 1 प्रतिनियुक्ति -
प्रशासन, बजट योजना एवं लेखा
2 उप संचालक(वित्त) 15600-39100 1 1 --
3 कनिष्ट लेखाधिकारी 9300-34800 1 -- 1
4 अधीक्षक 9300-34800 1 1 --
5 सहायक अधीक्षक 9300-34800 1 1 --
6 सहायक वर्ग 1 5200-20200 1 1 --
7 सहायक वर्ग 2 5200-20200 4 3 1
8 सहायक वर्ग 3 5200-20200 6 6 --
9 स्टेनोग्राफर-3 5200-20200 3 2 1
10 स्टेनो टायपिस्ट 5200-20200 5 5 --
11 डाटा एन्ट्री ऑपरेटर 5200-20200 1 1 --
12 प्रकाशन अधिकारी 9300-34800 1 - 1
13 तकनीकी सहायक 5200-20200 2 2 --
14 वीडियोग्राफर/छायाचित्रकार 5200-20200 1 1 --
15 वाहन चालक 5200-20200 3 3 --
16 भृत्य 4750-7440 6 6 --
17 चौकीदार जिलाध्यक्ष दर 1 1 --
18 अंशकालिक फर्राश जिलाध्यक्ष दर 1 1 --
योग :- 39 35 04
पुरातत्व, संग्रहालय एवं ग्रंथालय
19 संयुक्त संचालक 15600-39100 1 1 --
20 उप संचालक 15600-39100 4 2 2
21 पुरालेखवेत्ता 15600-39100 1 -- 1
22 ग्रंथपाल 15600-39100 1 1 --
23 सहायक ग्रंथपाल 9300-34800 1 1
24 सहायक उद्यान विकास अधिकारी 9300-34800 1 -- 1
25 उप अभियन्ता 9300-34800 1 -- 1
26 सहायक प्रोग्रामर 9300-34800 1 1 --
27 स्वागतकर्ता 5200-20200 2 2 --
28 डाटा एंट्री आपरेटर 5200-20200 1 1 --
29 सहायक वर्ग-3 5200-20200 2 2 --
30 भृत्य 4750-7440 4 4 --
योग :- 20 14 06
अभिलेखागार
31 उप संचालक 15600-39100 1 1 --
32 संरक्षण अधिकारी 9300-34800 1 -- 1
33 सहा. पुरा. अधि. 9300-34800 1 1 --
34 सहायक ग्रंथपाल 9300-34800 1 1 --
35 सहा. पुरालेखपाल 5200-20200 1 -- 1
36 सहायक वर्ग-2 5200-20200 1 1 --
37 डाटा एन्ट्री ऑपरेटर 5200-20200 1 1 --
38 बाईन्डर 5200-20200 1 1 --
39 भृत्य 4750-7440 2 2 --
योग :- 10 08 02
उत्खनन, मॉडलिंग, रसायन
40 सहायक यंत्री 15600-39100 1 - 1
41 मुख्य रसायनज्ञ 15600-39100 1 1 --
42 पुरातत्वीय अधिकारी 15600-39100 1 - 1
43 पुरातत्ववेत्ता 15600-39100 2 1 1
44 उपयंत्री 9300-34800 3 3 --
45 मानचित्रकार 9300-34800 2 2 --
46 कलाकार 9300-34800 2 2 --
47 रसायनज्ञ 9300-34800 2 1 1
48 सहायक कलाकार 5200-20200 2 1 1
49 सहायक रसायनज्ञ 5200-20200 2 1 1
50 उत्खनन सहायक 5200-20200 3 3 --
51 पर्यवेक्षक 5200-20200 1 1 --
52 सर्वेयर 5200-20200 3 2 1
53 सहायक वर्ग-2 5200-20200 3 2 1
54 सहायक वर्ग-3 5200-20200 3 3 --
55 मोल्डर/सेल्समेन 5200-20200 2 2 --
56 डाटा एन्ट्री ऑपरेटर 5200-20200 1 1 --
57 भृत्य 4750-7440 5 5 --
योग :- 39 31 08
राजभाषा, संस्कृति एवं गजेटियर
58 संयुक्त संचालक 15600-39100 1 प्रतिनियुक्ति पर 1 1
59 उप संचालक 15600-39100 1 1 --
60 सहायक संचालक 9300-34800 1 -- 1
61 अनुदेशक 9300-34800 2 2 --
62 शोध सहायक 9300-34800 2 2 --
63 अनुवादक 5200-20200 2 2 --
64 सहायक वर्ग-2 5200-20200 1 1 --
65 सहायक वर्ग-3 5200-20200 3 -- 3
66 डाटा एन्ट्री ऑपरेटर 5200-20200 1 1 --
67 भृत्य 4750-7440 2 2 --
योग :- 16 11 05
कार्यालय संग्रहाध्यक्ष जिला पुरातत्व संग्रहालय, (रायपुर, बिलासपुर, जगदलपुर, जांजगीर-चांपा, अम्बिकापुर, रायगढ़ राजनांदगांव)
68 संग्रहाध्यक्ष 15600-39100 7 - 7
69 वरिष्ठ मार्गदर्शक 9300-34800 3 3 --
70 कनिष्ठ मार्गदर्शक 5200-20200 4 3 1
71 सहायक ग्रेड-2 5200-20200 7 7 --
72 सहायक ग्रेड-3 5200-20200 7 3 4
73 डाटा एन्ट्री ऑपरेटर 5200-20200 3 3 --
74 भृत्य 4750-7440 10 2 8
75 चौकीदार 4750-7440 11 3 8
76 केयर टेकर 4750-7440 4 - 4
77 केयर टेकर जिलाध्यक्ष दर 12 12 -
78 फर्राश/स्वीपर अंशकालीन जिलाध्यक्ष दर 4 4 -
योग :- 72 40 32
महायोग :- 200 140 60
स्वीकृत सांख्येतर पदों की जानकारी
79 केयर टेकर 4750-7440 09 09 --
80 स्वीपर 4750-7440 01 01 --
81 केयर टेकर(नैमित्तिक) 4750-7440 06 06 --
82 उद्यान रेजा 4750-7440 03 03 --
83 उद्यान मजदूर 4750-7440 02 02 --
84 भृत्य 4750-7440 01 01 --
85 चौकिदार 4750-7440 सेवानिवृत्त
योग :- 22 22 --
छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग
86 अध्यक्ष 25000 प्र.मा. 01 1 --
87 सदस्य 18000 प्र.मा. 02 2 --
88 सचिव 37400-67000 01 1 --
89 उप सचिव 15600-39100 01 -- 1
90 लेखाधिकारी सह प्रशासनिक अधिकारी 15600-39100 01 -- 1
91 सहायक संचालक 15600-39100 01 1 --
92 हिन्दी/छत्तीसगढ़ी अनुवादक 9300-34800 01 -- 1
93 अधीक्षक 9300-34800 01 -- 1
94 सहायक ग्रेड-1 5200-20200 01 -- 1
95 सहायक ग्रेड-2 5200-20200 02 -- 2
96 स्टेनोग्राफर 5200-20200 02 1 1
97 कम्प्यूटर ऑपरेटर (संविदा) 8000 (एकमुस्त) 01 1 --
98 वाहन चालक 5200-20200 02 2 --
99 भृत्य 4750-7440 02 2 --
100 स्वीपर अंशकालीन 01 1 --
योग :- 20 12 08
पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी सृजन पीठ
1 अध्यक्ष 10000 प्रतिमाह 01 01 --
2 स्टेनो टायपिस्ट 5200-20200 01 01 --
3 भृत्य 4750-7440 01 01 --
योग :- 03 03 --
छत्तीसगढ़ सिन्धी साहित्य संस्थान
अध्यक्ष 6000 प्रतिमाह 01 01 --
उपाध्यक्ष 5000 प्रतिमाह 01 01 --
सचिव 15600-39100 01 -- 01
योग :- 03 02 01

विभाग के उद्देश्य
राज्य में कोई औपचारिक या विशेष नीति के स्थान पर राज्य की परम्पराओं-मान्यताओं का समावेश एवं उनके सवंर्धन के लिए सांस्कृतिक उद्देश्यों की परिकल्पना पर बल देते हुए राज्य की सांस्कृतिक गतिविधियों को नया आयाम दिया जा रहा है । जिसके अंतर्गत राज्य, अभिलेखीय एवं गैर अभिलेखीय परंपराओं के आधार पर संस्कृति को परिभाषित करेगा । राज्य, समुदायों के पारस्परिक संबन्धों को बनाये रखने एवं उनके मध्य समन्वय स्थापित करने का प्रयास करेगा, इसके अतिरिक्त सीमावर्ती पड़ोसी राज्यों के छत्तीसगढ़ राज्य के साथ सांस्कृतिक संबन्धों की नये परिप्रेक्ष्य में व्याख्या की जायेगी ।

छत्तीसगढ़ी राजभाषा एवं राज्य की अन्य बोलियों को प्रोत्साहित किया जावेगा । संस्कृति के ज्ञान का संचयन एवं उसका उपयोग समग्र रुप से एक सतत प्रक्रिया के रुप में देखा जायेगा । सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने एवं राज्य के विभिन्न सांस्कृतिक संस्थाओं को एक सूत्र में बांधने हेतु एक अंतरसंकायी समिति का निर्माण किया जायेगा, जिसमें विभिन्न कलाओं एवं संकायों उच्च स्तरीय विशेषज्ञों का समावेश होगा । प्रदेश की आदिम संस्कृति के संरक्षकों और कलाकारों को दूरस्थ अंचलों से चिन्हांकित करने के परिणाममूलक प्रायस किए जाएंगे ।

स्मारकों का संरक्षण संस्कृति नीति का विशिष्ट अंग होगा । राज्य को एक जीवंत संग्रहालय की नई परिकल्पना में रख कर विभिन्न समुदायों की संस्कृति का प्रस्तुतिकरण, नीति का एक प्रमुख भाग होगा । इसके अतिरिक्त समुदायों के जैविक- सांस्कृतिक तत्व तथा उनके मध्य परिवेशीय अंतरसंबन्धो को नया आयाम देते हुये यह प्रयास किया जावेगा । संस्कृति को संपूर्ण जीवन का आवश्यक अंग मानकर उसका संवर्धन एवं परिवर्धन क्षेत्रीय कार्यक्रम, शोध-संगोष्ठी एवं विभिन्न उत्सवों के माध्यम से करना विभाग का ध्येय है ।

क्रियाकलाप - संस्कृति विभाग का कार्य प्रदेश की संस्कृति, साहित्य एवं पुरातत्व का संवर्धन करना है तथा उसके उत्तरोत्तर विकास के लिये कार्य करते रहना है । विभाग के क्रियाकलाप मुख्यतः निम्नानुसार है–

  • संस्कृति से संबंधित नीतिगत मामले व नीति निर्धारण कार्य ।
  • साहित्य एवं कला का विकास ।
  • सांस्कृतिक परम्परा का संरक्षण ।
  • ललित कला तथा लोक कला को प्रोत्साहन ।
  • छत्तीसगढ़ राज्य की कला, संस्कृति, परम्पराओं एवं जनभाषाओं का संरक्षण, संवर्धन, प्रोत्साहन एवं देश विदेश में उसका प्रचार-प्रसार ।
  • अर्थाभावग्रस्त कलाकारों/साहित्यकारों को पेंशन व आर्थिक सहायता ।
  • अशासकीय सांस्कृतिक संस्थाओं को प्रोत्साहन व आर्थिक सहायता ।
  • चयनित कलाकारों/साहित्यकारों/विद्वानों को सम्मानित करने का कार्य ।
  • कला, संस्कृति एवं ऐतिहासिक विषयों के दुर्लभ एवं प्रामाणिक ग्रंथों, दस्तावेजों, स्मृति चिन्हों का संग्रह, प्रकाशन, प्रदर्शन तथा संबंधित व्याख्यान, संगोष्ठियों आदि का आयोजन ।
  • पुराने अभिलेखों का संरक्षण, संवर्धन ।
  • ऐतिहासिक महत्व के स्मारकों का संरक्षण तथा संग्रहालयों का विकास ।
  • ऐतिहासिक स्मारकों को पर्यटन स्थल के रुप में विकसित करना ।
  • सिनेमा अधिनियम के तहत नये सिनेमागृहों को लायसेंस ।
  • शासकीय कार्य में हिन्दी एवं छत्तीसगढ़ राजभाषा का प्रयोग तथा उसके विकास संबंधी कार्य ।
  • शैक्षणिक संस्थाओं में हिन्दी के साथ-साथ राजभाषा के प्रयोग तथा उसके विकास संबंधी कार्य ।

विभाग की प्रमुख उपलब्धियां

पुरखौती मुक्तांगन संकल्पना –
राज्य की संस्कृति, परंपरा, पुरातत्व, पर्यावरण और जीव-सृष्टि की सन्निधि में विकास की कल्पना को साकार करने हेतु पुरखौती मुक्तांगन का निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ और राज्य के पारंपरिक शिल्पियों के द्वारा इसे सांस्कृतिक धरोहर के रुप में आकार प्रदान करने का संकल्प जीवन्त हुआ । पुरखौती मुक्तांगन रायपुर से लगभग 20 कि. मी. की दूरी पर ग्राम-उपरवारा में लगभग 200 एकड़ भूमि पर आकार ग्रहण कर रहा है ।
महामहिम राष्ट्रपति महोदय द्वारा पुरखौती मुक्तांगन के प्रथम चरण का लोकार्पण किया गया, लोकार्पण समारोह में महामहिम राष्ट्रपति महोदय ने निर्माणाधीन इस योजना की सराहऩा की । राज्य की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के परिसर में माननीय मुख्यमंत्रीजी के हाथों पारंपरिक पौधों का रोपण कर शिल्प ग्राम निर्माण का संकल्प लिया गया । इस योजना के निर्माण कार्य हेतु ग्रामीण अभियांत्रिकी विभाग, अभनपुर एवं वन विभाग को क्रियान्वयन एजेन्सी के रुप में दायित्व सौंपा गया है ।
लगभग 200 एकड़ परिक्षेत्र में फैला पुरखौती मुक्तांगन शैक्षणिक केन्द्र होगा जिसमें छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति, कलाशिल्प, प्राकृतिक संरचना और भौगोलिक परिदृश्य, पर्यावरण और जैव विविधता को प्रदर्शित करने हेतु विकास कार्य संपन्न कराये जा रहे हैं जिसका लोकार्पण महामहिम राष्ट्रपति के द्वारा किया गया । महामहिम द्वारा पुरखौती मुक्तांगन की इस अवधारणा की सराहना की गई है ।
प्रथम चरण के विकास कार्य में भव्य प्रवेश द्वार, पर्यटन सूचना केन्द्र, पाथ-वे, माड़ियापथ, बैगा चौक, देवगुड़ी, छत्तीसगढ़ हाट, आभूषण पार्क, छत्तीसगढ़ी चौक, जनजातीय पारंपरिक शेड, मनोरंजन उद्यानगृह, सड़क एवं जल-निकास, लौह शिल्पियों की कार्यशाला एवं भित्तिचित्र निर्माण, सरगुजा की भित्तिचित्र का पारंपरिक जाली निर्माण, स्वतंत्रता सेनानियों की मूर्तियों का निर्माण, चहारदीवारी निर्माण, छत्तीसगढ़ का मानचित्र का निर्माण जिसमें छत्तीसगढ़ के विभूतियों को दिखाया गया है । भू-दृश्य सौंदर्यीकरण एवं विद्युत साज-सज्जा आदि कार्य संपन्न किये जा चुके हैं ।
वर्ष 2010-11 में पर्यटकों की संख्या एक लाख ऊपर रही एवं शासन के खजाने में राजस्व के रुप में राशि रु. 2.00 लाख जमा किए गए । इस वर्ष महत्वपूर्ण पर्यटकों में से प्रमुख रहे – राष्ट्रमण्डल कूल के माननीय संसदीय 200 सदस्यों का दल, गिनी राष्ट्र के प्रथम महिला एवं उनके साथ आए मंत्रीमण्डल के 15 सदस्य, छत्तीसगढ़ के महामहिम राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ विधानसभा के माननीय 60 सदस्यों का दल, बिहार एवं झारखण्ड के विधानसभा के माननीय अध्यक्षों, भा.प्र. सेवा के 40 प्रशिक्षु अधिकारी, भा.व. सेवा के 45 प्रशिक्षु अधिकारी का भी आगमन हुआ है एवं उन्होंने पुरखौती मुक्तांगन की स्वरुप की प्रशंसा की इस प्रकार पुरखौती मुक्तांगन परिसर भारत में पर्यटन के साथ-साथ सांसकृतिक एवं शैक्षणिक केन्द्र के रुप में आकार ले रहा है । दिनांक 25.10.2010 को चतुर्थ इंडिया एवं एशिया रीजन राष्ट्रकुल संसदीय सम्मेलन में पधारे माननीय सदस्य दल को सिरपुर, पुरखौती मुक्तांगन का भ्रमण एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया ।

पुरातत्व
पुरातत्वीय स्थलों का संरक्षण एवं विकास – राज्य की धरोहर, कला, संस्कृति एवं परंपराओं के प्रचार-प्रसार की दृष्टि से राजिम कुंभ, बस्तर दशहरा, शिवरीनारायण उत्सव, रायगढ़ में चक्रधर समारोह, सरगुजा में रामगढ़ उत्सव, बिलासपुर में बिलासा उत्सव, जांजगीर में जाज्वल्वदेव महोत्सव, सिरपुर में सिरपुर उत्सव, कांकेर में गढ़िया महोत्सव, करिया धुरवा मेला, रतनपुर उत्सव, मल्हार महोत्सव, खल्लारी महोत्सव, लोक मड़ई, डोंगरगढ़, भोरमदेव महोत्सव, ताला उत्सव आदि के आयोजन जिला प्रशासन व अन्य माध्यम से समन्वय कर संचालित किये जाते हैं ।

पुरातत्वीय उत्खनन

वर्ष 2010-11 हेतु विभाग को भारत सरकार से तीन स्थलों के उत्खनन हेतु अनुमति प्राप्त हुई है, जिसके अंतर्गत पचराही, जिला कबीरधाम, मदकुद्वीप, जिला बिलासपुर एवं सिरपुर, जिला महासमुंद में उत्खनन हेतु अनुज्ञा प्राप्त हुई है, जिसमें शीघ्र ही उत्खनन कार्य प्रारंभ की जावेगी ।
सिरपुर उत्खनन से 79 कास्य प्रतिमाएं, सिरपुर के सोमवंशी शासक तीवरदेव का 1 एवं महाशिवगुप्त बालार्जुन के 3 ताम्रपत्र सेट प्राप्त हुए हैं । अब तक सिरपुर में 32 प्राचीन टीलों पर प्राचीन संरचनाएं उत्खनन से प्रकाश में आए हैं । उत्खनन में पहली बार सिरपुर में मौर्य कालीन बौद्ध स्तूप प्राप्त हुए है । उत्खनन के साथ-साथ अनावृत्त संरचनाओं पर अनुरक्षण कार्य भी करवाया जा रहा है । सिरपुर में अनुरक्षण एवं विकास के कार्य कराए जा रहे हैं ।

पचराही उत्खनन से प्राचीन मुद्राएं, पाषण प्रतिमाएं एवं प्राचीन मंदिरों के भग्नावेष प्रकाश में आये हैं । उत्खनन के दौरान प्रागैतिहासिक काल, कल्चुरी काल, फणिनागवंश तथा मुगल काल के प्रमुख अवशेष प्राप्त हुए है । इस उत्खनन में छत्तीसगढ़ में पहली बार कवर्धा के फणी नागवंश का 1 स्वर्ण एवं 3 रजत मुद्रा प्रकाश में आए हैं , जिससे छत्तीसगढ़ के राजनैतिक इतिहास को एक नई दिशा मिली है । इसके अतिरिक्त कलचुरि राजा जाजल्यदेव तथा मुगलकालीन 12 ताम्र मुद्राएं प्रकाश में आई है । उत्खनन से ज्ञात होता है कि पचराही प्रागैतिहासिक काल से लेकर मुगल काल तक सतत् रुप से मानव जाति का विचरण स्थली रहा है । मुख्यमंत्री ने विशेष रुचि लेकर पचराही प्रवास के दौरान उत्खनन कार्य के संदर्भ में विभाग के प्रयासों और उपलब्धियों को रेखांकित कराया है ।


बिलासपुर जिले में शिवनाथ नदी के मध्य स्थित मदकूदीप में उत्खनन कार्य तथा रायपुर जिले में खारुन नदी के किनारे तरीघाट के टीलों में पुरातत्वीय तकनीकी सर्वेक्षण कार्य हेतु अनुमति प्राप्त हो गई है । इन कार्यों से राज्य की पुरातत्वीय संपदा और प्राचीन इतिहास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियों की प्रबल संभावना है । इस वर्ष अंबिकापुर जिले के रेंड नदी एवं रायपुर जिले के खारुन नदी के तटीय क्षेत्रों तथा पूरे छत्तीसगढ़ में मडू फोर्ट का गहन सर्वेक्षण किया जावेगा ।

अनुरक्षणकार्य -

  1. महापाषाणीय स्मारक (बहादुर कलारिन की माची), चिरचारी में अनुरक्षण, प्रोटेक्शन एवं स्थाल परिसर का सुरक्षा का घेरा कार्या ।
  2. प्राचीन शिव मंदिर, डमरु, रायपुर में अनुरक्षण, जीर्णोध्दार, प्लींथ, प्रोटेक्शन एवं सौन्दर्यीकरण कार्या । शिव मंदिर, गिरौद, रायपुर में अनुरक्षण सौन्दर्यीकरण एवं अन्य विकास कार्य ।
  3. ध्वस्त मंदिर (शाला भवन के पास स्थित), डीपाडीह, सरगुजा में अनुरक्षण बाऊन्ड्रीवाल सौन्दर्यीकरण इत्यादि ।
  4. शिव मंदिर, केशरपाल में अनुरक्षण एवं सौन्दर्यीकरण कार्य ।
  5. धमतरी, जिला पुरातत्व संग्रहालय भवन का निर्माण ।

अनुदान-

  1. कलेक्टर, जिला पुरातत्व संघ, कोरबा, को अनुदान ।
  2. कलेक्टर, जिला पुरातत्व संघ, राजनांदगांव को अनुदान ।
  3. कलेक्टर, जिला पुरातत्व संघ अंबिकापुर को अनुदान ।

संग्रहालय -

  1. महंत घासीदास संग्रहालय में परिसर में अधिकरी /कर्मचारी हेतु एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक का निर्माण करना ।
  2. जिला पुरातत्व संग्रहालय, जांजगीर-चांपा में प्रदर्शन कार्य, पुरावशेष तथा आदिवासी कला कृतियों का संग्रह का कार्य प्रस्तावित ।
  3. जिला पुरातत्व संग्रहालय, बैकुण्ठपुर, जिला कोरिया प्रदर्शन कार्य, पुरावशेष तथा आदिवासी कला कृतियों का संग्रह का कार्य प्रस्तावित ।
  4. धमतरी, जिला पुरातत्व संग्रहालय भवन की भूमि में बाऊन्ड्रीवाल का निर्माण कार्य प्रस्तावित ।
  5. जिला पुरातत्व संग्रहालय, जिला कांकेर प्रदर्शन कार्य, पुरावशेष तथा आदिवासी कला कृतियों का संग्रह का कार्य प्रस्तावित ।

रासायनिक संरक्षण -
वित्तीय वर्ष 2010 में राज्य संरक्षित स्मारक के अंतर्गत कपिलेश्वर मंदिर समूह बालोद, जिला दुर्ग, घुंघुसराजा मंदिर ग्राम देवकर जिला दुर्ग, महेशपुर जिला सरगुजा के उत्खनन से प्राप्त लगभग 50 प्रस्तर प्रतिमाओं का रेस्टोरेसन कार्य तथा मंदिरवशेषों का रासायनिक संरक्षण कार्य एवं नवागढ़ जिला दुर्ग स्थित प्रस्तर शिलालेख का रसायनिक संरक्षण कार्य सम्पन्न किया जा चुका है । बत्तीसा मंदिर बारसूर जिला दंतेवाड़ा, देवरली मंदिर ढोण्ढरेपाल जिला बस्तर, एवं कुलेश्व मंदिर, नवागांव, जिला धमतरी का रसायनिक संरक्षरण कार्य किया जाना प्रस्तावित है ।

ग्रंथालय-
संस्कृति विभाग के अंतर्गत संचालित महंत सर्वेश्वरदास ग्रंथालय को राज्य स्तरीय ग्रंथालय का दर्जा दिया गया है । ग्रंथालय में ई-लाईब्रेरी के रुप में विकसित किया जा रहा है । इस ग्रंथालय में इतिहास, पुरातत्व, नृतत्व शास्त्र, लोक प्रशासन, हिन्दी साहित्य, पत्रकारिता, पर्यटन एवं कम्प्यूटर आदि के अतिरिक्त हिन्दी, अंग्रेजी तथा संस्कृत साहित्य से संबंधित ग्रंथ तथा गज़ेटियर उपलब्ध हैं । ग्रंथालय में प्रतियोगी परीक्षाओं के छात्र-छात्राओं के अध्ययन हेतु पृथक से अध्ययन कक्ष की सुविधा उपलब्ध कराई गई है ।

प्रकाशन

  1. विभागीय वार्षिक शोध पत्रिका कोसल अंक-3 का प्रकाशन किया गया । (नवम्बर 2010)
  2. बिहनिया अंक-8 का प्रकाशन किया गया । (जनवरी 2011) ।
  3. छत्तीसगढ़ की स्थापत्य कला (सरगुजा जिले के विशेष संदर्भ में)।
  4. पचराही सेमीनार की प्रोसिडिंग्स का प्रकाशन किया गया ।
  5. स्वतंत्रता दिवस, राज्योत्सव, राज्य दिवस आदि विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन पर ब्रोशर का प्रकाशन कराया गया ।
  6. न्यूज लेटर भाग -1,2, एवं 3 का प्रकाशन ।

अभिलेखागार-
संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय भोपाल मध्य प्रदेश से ऐतिहासिक एवं महत्वपूर्ण (स्थायी प्रकृति के) मूल अभिलेखों के स्थानान्तरण की कार्रवाई प्रगति पर है । इसके तहत छत्तीसगढ़ डिवीज़नल रिकार्ड की सन् 1856 की 468 छाया प्रतियाँ अधिग्रहीत कर लायी गई है । संस्कृति संचालनालय मध्यप्रदेश से पूर्ववर्ती-पश्चातवर्ती छत्तीसगढ़ के समस्त 16 जिलों (छत्तीसगढ़ राज्यांचल) की लगभग 8500 एवं पूर्ववर्ती-पश्चातवर्ती मध्यप्रदेश के जिलों की भी 10-10 प्रतियाँ भी अधिग्रहीतकर लायी गई हैं । अन्यत्र संधारित लगभग एक हजार प्रतियाँ विभिन्न अभिलेखों से छँटाई कर अगामी माह में लाया जाना है । राष्ट्रीय पाण्डुलिपि मिशन भारत सरकार द्वारा अभिलेखागार प्रभाग के माध्यम से छत्तीसगढ़ में पाण्डुलिपियों का सर्वेक्षण कराये जाने के अन्तर्गत 5931 (लगभग पाँच लाख पृष्ठ) पाण्डुलिपियों दर्ज की गई हैं । राष्ट्रीय पाण्डुलिपि मिशन भारत सरकार द्वारा ही अभिलेखागार प्रभाग के माध्यम से दो प्रोजेक्ट, प्रायोजित कर आरम्भ कर दिए गए हैं । इसके तहत उप संचालक अभिलेखागार को Manuscript Resource Centre-MRC एवं सहायक पुरालेख अधिकारी को Manuscript Conservation Centre MCC का राज्य समन्वयक मनोनीत कर छत्तीसगढ़ की पाण्डुलिपियों का डाक्युमेंटेशन एवं संरक्षण-परिरक्षण कराया जा रहा है ।

राजभाषा
राज्य की संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु संस्कृति नीति के अनुरुप सांस्कृतिक गतिविधियों को आयाम प्रदान किया जा रहा है । इसके अंतर्गत छत्तीसगढ़ के विभिन्न समुदायों के सांस्कृतिक विकास के लिए कला एवं जीवन, मौखिक एवं लिखित परम्परा के बीच में अन्तर्सबंध की पहचान, उनके अभिलेखन, प्रदर्शन, प्रकाशन एवं प्रचार करने का प्रयास किया गया है तथा समुदायों के बीच प्रचलित संस्कृति को प्रोत्साहित करने एवं उसे विकसित करने में राज्य के संस्कृति विभाग द्वारा एक उत्प्रेरक की भूमिका का सफल निर्वहन किया जा रहा है । तद्नुसार विभागीय योजनान्तर्गत छत्तीसगढ़ अंचल के लोक पारंपरिक उत्सवों, साहित्यिक आयोजनों एवं संगोष्ठियों हेतु अर्थाभावग्रस्त लेखको, कलाकारों एवं उनके आश्रितों को वित्तीय सहायता योजना के अन्तर्गत वर्ष 2010-11 में 69 कलाकारों/साहित्यकारों को कुल रु. 12,42,000/- का भुगतान किया गया । छत्तीसगढ़ कलाकार कल्याण कोष से सहायता योजना के अंतर्गत वर्ष 2010-11 में 24 को 3,600/- का भुगतान किया गया है ।

अशासकीय संस्थाओं को अनुदान वर्ष 2010-11 में कुल 134 लोगों को 85,34,000/- का भुगतान तथा विभिन्न जिलों में सांस्कृतिक आयोजनों/महोत्सवों/मेलों हेतु कुल 58,25,000/- का आबंटन कलेक्टरों को प्रदाय किया गया है ।

संग्रहालय -
अतीत के अवशेषों के संरक्षण, प्रदर्शन, अध्ययन तथा प्राचीन ज्ञान-विज्ञान के स्त्रोतों के अनुसंधान के लिए संग्रहालयों की महत्वपूर्ण भूमिका है । राज्य शासन के विभिन्न संग्रहालयों के उन्नयन तथा नवीन संग्रहालयों की स्थापना के लिए विशेष रुप से सचेष्ट है । अंबिकापुर, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, कोरिया एवं कांकेर में जिला पुरातत्व संग्रहालय बनाया जा रहा है ।

महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय, रायपुर को राज्य स्तरीय संग्रहालय के समकक्ष उन्नयन किया गया है । दीर्घाओं में तकनीकी ढंग से साज-सज्जा तथा प्रदर्शन पर ध्यान दिया गया है ।

प्राचीन नगरी सिरपुर के उत्खनन से प्राप्त पुरावशेषों की सुरक्षा एवं प्रदर्शन हेतु संग्रहालय निर्माण कार्य की योजना प्रस्तावित है । योजना के अंतर्गत स्थल का अधिपत्य प्राप्त कर बाउण्ड्रीवाल निर्माण का कार्य पूर्ण हो चुका है । सिरपुर संग्रहालय भवन निर्माण हेतु कार्ययोजना पर कार्यवाही की जा रही है । साथ ही नव उत्खनित स्थल पचराही जिला कबीरधाम तथा महेशपुर जिला- सरगुजा में स्थानीय संग्रहालय निर्माण की योजना पर कार्यवाही की जा रही है ।

  1. इसके साथ-साथ जिला पुरातत्व संग्रहालय, जगदलपुर के नवीन भवन निर्माण का कार्य प्रगति पर है । राज्य संरक्षित स्मारक स्थल देवरानी-जेठानी मंदिर परिसर में पर्यटन दृष्टि से स्थानीय संग्रहालय भवन का निर्माण तथा पुरावशेषों का प्रदर्शन किया गया है । धमतरी, अंबिकापुर इत्यादि स्थनों पर भी संग्रहालय निर्माण की कार्यवाही चल रही है ।
  2. राजनांदगांव, भोरमदेव तथा कोरबा में जिला पुरातत्व संग्रहालयों का निर्माण कर उन्हें प्रदर्शन कर जनसामान्य के अवलोकन हेतु खोल दिया गया है । इसके अतिरिक्त पंचायत स्तर पर ग्राम पासीद तथा मठपुरैना में भी स्थानीय संग्रहालयों का निर्माण किया गया है । जिला मुख्यालय कोरबा में नगर निगम, कोरबा के सहयोग से पुरावशेषों की सुरक्षा को दृष्टिगत करते हुए वृहद संग्रहालय का निर्माण किया जा रहा है ।

मॉडलिंग-
वर्तमान में माडलिंग शाखा में गणेश, मंजुश्री, पद्मपाणी, महिषासुर मर्दिनी, नर्तक पुरुष, चंवरधारिणी नायिका, भू-स्पर्स बुद्ध मसंतक एवं अशोक वाटिका में सीता एवं हनुमान की प्रतिकृतियां लगभग 500 नग तैयार की जा चुकी हैं तथा 200 नग मार्च 2011 तक और निर्मित होने की संम्भावना है । इसके आलावा दो नग नवीन मोल्ड चंवरधरिणी नयिका प्रतिमाओं का मोल्ड तैयार किया गया है । इसी सत्र में पुरावशेषों तथा प्रतिकृति निर्माण के प्रति जागरुकता विकसित करने की दृष्टि से शासकीय दूधाधारी बजरंग महिला महाविद्यालय रायपुर (छ.ग.) में 10 दिवसीय कार्यशाला कर 40 प्रशिक्षुओं को प्लास्टर प्रतिकृति निर्माण में प्रशिक्षित किया गया । विभाग में उपलब्ध प्लास्टर कास्ट प्रतिमाओं तथा प्रकाशनों के विक्रय हेतु संग्रहालय परिसर में विक्रय केन्द्र का निर्माण कर विक्रय हेतु प्लास्टर प्रतिकृतियां व प्रकाशन उपलब्ध है ।

आर्ट गैलरी
महंत घासीदस स्मारक संग्रहालय परिसर स्थित आर्ट गैलरी में विभिन्न शासकीय, अर्द्दशासकीय एवं निजी संस्थाओं के माध्यम से कला सांस्कृतिक परंपराओं के प्रचार-प्रसार तथा मूल स्थान व निर्धारित स्थानों पर प्रदर्शनी की संकल्पना को क्रियान्वित करने हेतु राज्य की पंरपराओं तथा सांस्कृतिक कलात्मक संपदा का प्रदर्शन, जनजागरुता के उद्देश्य से किया/कराया जा रहा है ।

छत्तीसगढ़ बहुआयामी संस्कृति संस्थान –
राज्य के विविध सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रदर्शन, विकास, प्रचार-प्रसार संकलन, कार्यशाला आदि के प्रत्यक्ष आयोजन से संबंधित संस्थान के विकास हेतु छत्तीसगढ़ बहुआयामी सांस्कृतिक संस्थान के गठन किया गया है । संस्थान में ख्यातिप्राप्त साहित्यकारों, कलाकारों कलाकारों की एक अंत: संकायी समिति होगी । साथ ही विविध कलाओं एवं संकाओं से चयनित उच्चस्तरीय विशेषज्ञ सम्मिलित होंगे । यह केन्द्र समुदायों के विशिष्ट सांस्कृतिक क्रियाकलापों को सर्वत्र प्रोत्साहित करेगा । इस योजना को साकार करने के उद्देश्य से आडिटोरियम, मुक्ताकाश मंच, आर्ट गैलरी आदि तैयारी किया जाना है । बहुआयामी संस्कृति संस्थान के निर्माण हेतु राजधानी के मध्य पंडरी में 4.8 एकड़ भूमि उपलब्ध हो चुकी है । इस सांस्कृतिक परिसर के निर्माण हेतु देश भर के अनुभवी वास्तुविदों से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर इससे संबंधित डी.पी.आर. प्रशासकीय विभाग को अनुमोदन हेतु रु. 40.37 करोड़ का वित्त विभाग को प्रेषित किया गया है । अनुमोदन प्राप्त होते ही अग्रिम कार्यवाई प्रारंभ की जावेगा ।

लोकोत्सव व पारंपरिक मेलों का विकास-
राज्य की धरोहर, कला, संस्कृति एवं परंपरओं के प्रचार-प्रसार की दृष्टि से राजिम कुंभ, बस्तर दशहरा, शिवरीनारायण उत्सव, रायगढ़ में चक्रधर समारोह, सरगुजा में रामगढ़ उत्सव, बिलासपुर में बिलासा उत्सव, जांजगीर में जाज्वल्वदेव महोत्सव, सिरपुर में सिरपुर उत्सव, कांकेर में गढ़िया महोत्सव, करिया धुरवा मेला, रतनपुर उत्सव, मल्हार महोत्सव, खल्लारी महोत्सव, लोक मड़ई, डोंगरगढ़, भोरमदेव महोत्सव, ताला उत्सव आदि के आयोजन जिला प्रशासन व अन्य माध्यम से समन्वय कर संचालित किये जाते हैं ।

राज्योत्सव का आयोजन-
राज्य स्थापना दिवस 01 नवम्बर के अवसर पर राज्य के विभिन्न अंचल केस्थापित लोक कलाकारों, कला दलों के साथ-साथ नवोदित और अल्पज्ञात कलाकारों को प्रस्तुति हेतु अवसर उपलब्ध कराया गया । जिसमें राष्ट्रीय कलाकारों के साथ नये कलाकारों की पहचान, प्रोत्साहन एवं रचनात्मक स्वरुप की झलक प्रस्तुत हुई । राज्योत्सव के सात दिवसीय मुख्यसमारोह में प्रदेश के लोक कलाकारों के साथ-साथ देश के विभिन्न राज्यों के प्रतिष्ठित कलाकारों के द्वारा आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुति दी गई ।

राजिम कुंभ-
राज्य के त्रिवेणी संगम राजिम जहॉं प्रतिवर्ष माघ पूर्णिमा को पारंपरिक रुप से मेले का आयोजन होता था, उसे नियमित स्वरुप प्रदान कर राजिम कुंभ मेला समिति गठित किया गया है । राज्य के संस्कृति के विकास एवं पर्यटन को प्रोत्साहन प्रदान करने हेतु राजिम में शंकराचार्य, महामंडलेश्वर, मठाधीश, संत-महात्माओं एवं जन प्रतिनिधियों के मार्गदर्शन में कुंभ मेले का आयोजन किया जाता है । इस अवसर पर देश के कोने-कोने से साधु-संतों का समागम राजिम में होता है । छत्तीसगढ़ का प्रयाग राज में इस आयोजन से संस्कृति, धरोहर, लोक परंपरा एवं कला को एक नया आयाम जुड़ा है । इस दौरान राष्ट्रीय स्तर व आंचलिक कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और साहित्यिक संगोष्ठी एवं विभागीय प्रदर्शनीय का आयोजन पूरे पंचकोशी क्षेत्र में किया जाता है । इस वर्ष राजिम कुंभ मेला अर्द्धकुंभ के रुप में मनाया जा रहा है ।

कला एवं संस्कृति-
प्रदेश की संस्कृति एवं साहित्य के संरक्षण व संवर्धन हेतु विभागीय नीति के अनुरुप कार्यक्रम तैयार कर गतिविधियों का संचालन विभाग द्वारा किया जाता है, जिससे समुदायों के बीच पारंपरिक संबन्धों को बनाये रखने में, उन्हें विकसित करने में, उनके जीवन, उनकी कलाओं को उत्प्रेरित किया जा सके । स्थानीय समुदायों की अबाध सांस्कृतिक परम्पराओं की पहचान, मान्यता देना, पुनर्जी वित करना, दस्तावेजीकरण, प्रस्तुति एवं उनका प्रचार-प्रसार किया जा रहा है । साथ ही छत्तीसगढ़ के अद्वितीय सांस्कृतिक वैविध्य एवं विशिष्ट पहचान को परिभाषित कर, उसके सीमावर्ती पड़ोसी राज्यों तथा सांस्कृतिक प्रदेशों के साथ संबंध व विनिमय स्थापित किया जा रहा है । राज्य की समृद्ध जनजातीय परंपरा के संरक्षण एवं परिवर्धन हेतु विभिन्न कार्यक्रम, जिसमें जनजातीय रहन-सहन, तौर तरीके, रीति-रिवाज, लोक नृत्य, गायन एवं अन्य परंपराओं को बनाये रखने हेतु भी कार्य किया गया है । इस हेतु विभागीय क्रियाकलाप के साथ-साथ साहित्य, संस्कृति और कला के क्षेत्र में कार्यरत स्वायत्तशासी एवं निजी क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाओं को आर्थिक सहायता दी गई है । विभाग के अन्तर्गत 'छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग', 'स्वामी विवेकानंद विश्व प्रबुद्ध संस्थान', 'पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी सृजन पीठ' एवं 'छत्तीसगढ़ सिंधी साहित्य संस्थान' गठित है, जिसके माध्यम से सांस्कृतिक एवं साहित्यिक गतिविधियों के विकास एवं संवर्धन की दिशा में हो रहे कार्यों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है ।

आयोजन एवं उत्सव -
राज्य, नयी संस्थाओं/उत्सवों को प्रस्थापित करने के बजाय अस्तित्वमान पृष्ठभूमि वाले उत्सवों/संस्थाओं को प्रोत्साहित करता है ताकि राज्य की पारंपरिक संस्कृति अविच्छिन्न बनी रहे और समाज-संस्कृति के विभिन्न क्षेत्रों में अंत:संकायी संवाद कायम रहे । इस तारतम्य में विभाग द्वारा निम्नलिखित कार्यक्रम आयोजित किये गए/सहयोग प्रदान किया गया -

छत्तीसगढ़ शासन संस्कृति विभाग के अंतर्गत छत्तीसगढ़ लाटर शो, स्वर संस्कृति कार्यशाला, म्यूजिकल कलरफुल प्रोग्राम, श्रम दिवस पर आयोजित कार्यक्रम, लोकरंग, छत्तीसगढ़ी फिल्म स्टार नाईट, फिल्म संगीत, 'ममता' मदर्स डे के अवसर पर कार्यक्रम, छत्तीसगढ़ी फिल्म संगीत, कत्थक समूह नृत्य, शादना महोत्सव, मुक्तांगन महोत्सव, पावस प्रसंग, छत्तीसगढ़ उत्सव, नूर-ए-लता, नगमा-ए-मुकेश, नजाकत-ए-रफी, नटखट किशोर, पारंगत महोत्सव आदि का आयोजन संपन्न किया जा चुका है, जो भविष्य में भी निरन्तर जारी रहेगा ।

सफर मुक्ताकाश का आयोजन - राज्य की मंचीय प्रतिभाओं तथा चित्रकारों को नियमित अवसर प्रदान कर राजधानी में सुधि नागरिकों की रुचि और आग्रह के अनुरुप प्रत्येक माह के दूसरे तथा चौथे शनिवार को आयोजित 'सफर मुक्ताकाश' के अंतर्गत अप्रैल 10 से अब तक 44 नाटकों तथा लोक गायकों का गायन प्रस्तुत कराया गया है ।

नाचा गम्मत का आयोजन - राज्य के अंतर्गत लुप्तप्राय प्रमुख नाचा से संबंधित संस्कृति को जीवित रखने के उद्देश्य से प्रत्येक माह के पहले तथा तीसरे रविवार को 'नाचा गम्मत' जनवरी 11 से प्रारंभ किया जा चुका है । जिसमें से अभ तक 3 कार्यक्रमों की प्रस्तुति हो चुकी है ।

विभाग के अंतर्गत स्थापित राज्य स्तरीय सम्मान-

  1. पं. सुन्दरलाल शर्मा सम्मान (साहित्य/आंचलिक साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान हेतु राज्य स्तरीय सम्मान), इस वर्ष डॉ. उज्जवल पाटनी, दुर्ग एवं डॉ. विनय कुमार पाठक, बिलासपुर को प्रदान किया गया ।
  2. चक्रधर सम्मान (कला/शिल्प कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान हेतु राज्य स्तरीय सम्मान), पद्मश्री जे.एम.नेल्सन, भिलाई (2009) एवं इस वर्ष पं. रवि शंकर व्यास को प्रदान किया गया ।
  3. दाऊ मंदराजी सम्मान (लोक कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान हेतु राज्य स्तरीय सम्मान), इस वर्ष श्री मान दास टंडन को प्रदान किया गया ।
  4. छत्तीसगढ़ अप्रवासी भारतीय सम्मान (विदेश में रहकर देश व राज्य का प्रोत्साहन करने हेतु अंतरराष्ट्रीय सम्मान) इस वर्ष पं. कमला प्रसाद मिश्र को प्रदान किया गया ।
  5. इसके अतिरिक्त अन्य विभागों द्वारा दिए जाने वाले सम्मानों के सम्मान समारोह का समन्वय एवं अलंकरण समारोह संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित किया गया ।

संगोष्ठी एवं प्रदर्शनी -
संस्कृति विभाग के अंतर्गत सांस्कृति परंपराओं के प्रचार-प्रसार तथा मूल स्थान व निर्धारित स्थानों पर प्रदर्शनों की संकल्पना को क्रियान्वित करे हेतु राज्य की परंपराओं तथा सांस्कृतिक व कलात्मक संपदा का निम्नानुसार प्रदर्शन जनजागरूकता के उद्देश्य से किया गया / कराया जा रहा है -

  1. राज्योत्सव 2010 के अवसर पर पुरातत्व संबंधी प्रदर्शनी, मूल प्रतिमाओं की प्रदर्शनी तथा उत्खनन कार्यशाला का आयोजन किया गया ।
  2. सफर मुक्ताकाश के अंतर्गत अप्रैल 2010 से अब तक 5 प्रदर्शनियों का आयोजन किया गया ।
  3. 18 मई 2010 को संग्रहलाय दिवस के अवसर पर संगोष्ठी का आयोजन ।
  4. आगामी मार्च माह 2011 में दो दिवसीय शैलचित्र तथा पुरातत्व से संबंधित नवीन खोज पर आधारित संगोष्ठी प्रस्तावित है ।

लोक शिल्पियों की कार्यशाला सह प्रशिक्षण-
रायपुर में मई 2010 को 'आकार 2010' प्रशिक्षण शिविर के अंतर्गत मृदा शिल्प, ढोकरा शिल्प, मधुबनी चित्रकला, फड़ चित्रकला, जरदोजी कला, पट्ट चित्रकला, काष्ठ शिल्प, भित्ति चित्रकला के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शिल्प गुरुओं द्वारा बड़ी संख्या में प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण दिया गया । रायपुर के साथ-साथ बिलासपुर में जून 2010 में 15 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया । इन शिविरों में शास्त्रीय नृत्यों का प्रशिक्षण भी दिया गया । 29 मार्च से 04 अप्रैल 2010 तक शिल्प मड़ई में देशभर के हस्तशिल्प कलाकार अपने उत्पादों का प्रदर्शनी भी किया गया ।

विभाग के अधीनस्थ गठित इकाईयां

छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग, रायपुर -
छत्तीसगढ़ी को राज्य की राजभाषा का दर्जा प्रदान कर छत्तीसगढ़ी के प्रचलन, विकास एवं राजकाज में उपयोग हेतु समस्त उपाय करने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा 'छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग' की स्थापना की गई है । छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ साहित्यकारों को उनकी छत्तीसगढ़ी साहित्य के प्रति सेवा हेतु 'छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग सम्मान 2010' से सम्मानित किया गया । छत्तीसगढ़ी या छत्तीसगढ़ी से संबंधित किसी भी भाषा की पुस्तकों का क्रय कर संग्रहित करने की योजना 'माई कोठी' के अंतर्गत रु. 40000/- की पुस्तकों का क्रय करने की योजना है । छत्तीसगढ़ी के लुप्त होते शब्दों को संग्रहित करने हेतु 'बिजहा कार्यक्रम' प्रारंभ किया गया जिसका उद्देश्य राज्य के सभी लोगों से प्रचलन से बाहर हो रहे सभी शब्दों को संग्रह करने की योजना है ।

विवेकानन्द विश्व प्रबुद्ध संस्थान, रायपुर -
स्वामी विवेकानन्दजी ने कोलकाता के पश्चात् अपने जीवन का सर्वाधिक समय रायपुर में व्यतीत किया । स्वामी जी के जीवनकाल को स्मरणीय बनाने हेतु विवेकानन्द विश्व प्रबुद्ध संस्थान की स्थापना की गयी है, जिसके अंतर्गत स्वामी विवेकानंदजी के विचारों के अनुरुप अंतर्राष्ट्रीय संबंध भारत दर्शन, प्रबंधशास्त्र, युवाकल्याण एवं ग्रामीण विकास जैसे विषयों पर अध्ययन एवं शोध कार्य संचालित किया जाना प्रस्तावित है ।

पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी सृजनपीठ, भिलाई -
छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग के अंतर्गत राष्ट्रभाषा हिन्दी के महान साहित्यकार एवं छत्तीसगढ़ की पावन धरती के माटी पुत्र डॉ. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी जी की पावन स्मृति में साहित्यिक संस्था सृजनपीठ कार्यरत है । इस संस्थान ने अपनी राष्ठ्रीय गतिविधियों से अब पूरे देशभर के साहित्यकारों में अपनी पहचान और सम्मानजनक स्थान बना लिया है । दिनांक 27 मई 2010 को डॉ. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी जी की जयन्ती के अवसर पर गोष्ठी का आयोजन किया गया । दिनांक 3 अक्टूबर 2010 को दुर्ग के वरिष्ठ साहित्यकार श्री गुलबीर सिंह भाठिया की कृति 'मछली का मायका' पर परिचर्चा गोष्ठी आयोजित की गई । दिनांक 22 अक्टूबर 2010 को आचार्य महेशचंद शर्मा क कृति "धर्म और राजनीति" पर परिचर्चा गोष्ठी आयोजित की गई । बख्शी जी की पुण्य तिथि के अवसर पर 2 जनवरी 2011 को बिलासपुर स्थित दीक्षित सभागार में एक दिवसीय साहित्यकार सम्मेलन का आयोजन किया गया एवं दिनांक 6.3.2011 को "भारतीय पत्रकारिता, मुद्दे एवं अपेक्षायें" का विमोचन एवं एक वैचारिक संगोष्ठी का आयोजन प्रस्तावित है ।

छत्तीसगढ़ सिन्धी साहित्य संस्थान का गठन -
छत्तीसगढ़ शासन, संस्कृति विभाग द्वारा संचालित छत्तीसगढ़ सिन्धी साहित्य संस्थान द्वारा अब तक कुल 35 गतिविधियों/कार्यक्रमों का आयोजन किया जा चुका है । संस्थान द्वारा बच्चों को सिंधी भाषा की शिक्षा देने हेतु रायपुर के विभिन्न सिंधी बाहुल्य क्षेत्रों में तीन केंद्र वहां की पूज्य सिंधी पंचायतों के सहयोग से संचालित हैं । संस्थान द्वारा सिंधी भाषा एवं संस्कृति के उत्थान हेतु विभिन्न क्रियाकलाप समय-समय पर शासन के सहयोग से संचालित किए जाते रहे हैं । छत्तीसगढ़ शासन द्वारा छत्तीसगढ़ सिंधी साहित्य संस्थान का विगत दिनों पुनर्गठन किया गया, जिसमें मनोनीत पदाधिकारियों, सदस्यों एवं सलाहकारों को मुख्यमंत्री निवास में दिनांक 04.02.2011 को माननीय मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने गरिमामय समारोह में नियुक्ति-पत्र प्रदान किये ।