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संस्कृति विभाग
छत्तीसगढ़ शासन
संस्कृति विभाग
वार्षिक प्रशासकीय प्रतिवेदन 2008 - 2009


विभाग का नाम संस्कृति विभाग
मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल
सचिव श्री सुब्रत साहू
उपसचिव डॉ. तपेशचन्द्र गुप्ता
अवर सचिव श्री एन.डी. भोयर
संचालनालय
आयुक्त श्री राजीवचन्द्र श्रीवास्तव
संयुक्त संचालक डॉ. तपेशचन्द्र गुप्ता
उप संचालक श्री राहुल कुमार सिंह, श्री एस.एस. यादव,
श्री जे.आर. भगत, श्री एस.बी. सतपाल,
श्री एस.एस.सी. केरकेट्टा
विभाग के अधीनस्थ गठित इकाईयां
छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग
अध्यक्ष श्री श्यामलाल चतुर्वेदी
सदस्य डॉ. रमेन्द्रनाथ मिश्र,
श्री केदार सिंह परिहार
सचिव डॉ. सुरेन्द्र दुबे
पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी सृजन पीठ
अध्यक्ष श्री बबन प्रसाद मिश्र
छत्तीसगढ़ सिंधी साहित्य संस्थान
अध्यक्ष रिक्त
सचिव डॉ. एम.आर. थधानी

संचालनालय संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग,रायपुर के विभागाध्यक्ष तथा मैदानी कार्यालयों की स्वकृत पद संरचना

सं.क्र. पदनाम वेतनमान स्वीकृत पद भरे पद रिक्त पद
1 आयुक्त अखिल भारतीय सेवा से 1 पद प्रतिनियुक्ति -
2 संयुक्त संचालक 15600-39100 2 पद 1 प्रतिनियुक्ति
1
3 उप संचालक 15600-39100 5 पद 4 पद 1
योग :- 8 पद
प्रशासन, बजट योजना एवं लेखा
4 उप संचालक (वित्त) 15600-39100 1 पद -- --
5 कनिष्ट लेखाधिकारी 9300-34800 1 पद -- --
6 अधीक्षक 9300-34800 1 पद -- --
7 सहायक अधीक्षक 9300-34800 1 पद -- --
8 सहायक वर्ग 1 5200-20200 1 पद 1 --
9 सहायक वर्ग 2 5200-20200 4 पद 4 पद --
10 सहायक वर्ग 3 5200-20200 6 पद 6 --
11 स्टेनोग्राफर-3 5200-20200 3 पद 2 1
12 स्टेनो टायपिस्ट 5200-20200 5 पद - --
13 डाटा एन्ट्री ऑपरेटर 5200-20200 1 पद 1 --
14 प्रकाशन अधिकारी 9300-34800 1 पद - 1
15 तकनीकी सहायक 5200-20200 2 पद 2 --
16 वीडियोग्राफर/छायाचित्रकार 5200-20200 1 पद 1 --
17 वाहन चालक 5200-20200 3 पद 3 --
18 भृत्य 4750-7440 6 पद 6 --
19 चौकीदार जिलाध्यक्ष दर 1 पद 1 --
20 अंशकालिक फर्राश जिलाध्यक्ष दर 1 पद 1 --
योग :- 34 पद 05 पद
पुरातत्व, संग्रहालय एवं ग्रंथालय
21 मुद्राशास्त्री 15600-39100
1 पद -- 1
22 पुरालेखवेत्ता 15600-39100 1 पद -- 1
23 ग्रंथपाल 15600-39100 1 पद -- 1
24 सहायक ग्रंथपाल 9300-34800 1 पद 1 --
25 सहायक उद्यान विकास अधिकारी 9300-34800 1 पद 1
26 उप अभियन्ता 9300-34800 1 पद 1 1
27 सहायक प्रोग्रामर 9300-34800 1 पद 1 --
28 स्वागतकर्ता 5200-20200 2 पद 1 --
29 डाटा एंट्री ऑपरेटर 5200-20200 1 पद 2 --
30 सहायक वर्ग-3 5200-20200 2 पद 4 --
31 भृत्य 4750-7440 4 पद 4 पद --
12 पद 4 पद
अभिलेखागार
32 उप संचालक 15600-39100 1 पद 1 --
33 पुरालेख अधिकारी 15600-39100 1 पद -- 1
34 संरक्षण अधिकारी 9300-34800 1 पद -- 1
35 सहा. पुरा. अधि. 9300-34800 1 पद -- 1
36 सहायक ग्रंथपाल 9300-34800 1 पद 1 --
37 सहा. पुरालेखपाल 5200-20200 1 पद 1 --
38 सहायक वर्ग-2 5200-20200 1 पद 1 --
39 डाटा एन्ट्री ऑपरेटर 5200-20200 1 पद 1 --
40 बाईन्डर 5200-20200 1 पद 1 --
41 भृत्य 4750-7440 2 पद 2 --
11 पद
उत्खनन, मॉडलिंग, रसायन
42 सहायक यंत्री 15600-39100 1 पद - 1
43 मुख्य रसायनज्ञ 15600-39100 1 पद 1 --
44 पुरातत्वीय अधिकारी 15600-39100 1 पद - 1
45 पुरातत्ववेत्ता 15600-39100 2 पद 1 1
46 उपयंत्री 9300-34800 3 पद 3 --
47 मानचित्रकार 9300-34800 2 पद 2 --
48 कलाकार 9300-34800 2 पद 2 --
49 रसायनज्ञ 9300-34800 2 पद 2 --
50 सहायक कलाकार 5200-20200 2 पद 1 1
51 सहायक रसायनज्ञ 5200-20200 2 पद 2 --
52 उत्खनन सहायक 5200-20200 3 पद 3 --
53 पर्यवेक्षक 5200-20200 1 पद 1 --
54 सर्वेयर 5200-20200 3 पद 3 --
55 सहायक वर्ग-2 5200-20200 3 पद 3 --
56 सहायक वर्ग-3 5200-20200 3 पद 3 --
57 मोल्डर/सेल्समेन 5200-20200 2 पद 2 --
58 डाटा एन्ट्री ऑपरेटर 5200-20200 1 पद 1 --
59 भृत्य 4750-7440 5 पद 5 --
34 पद 05 पद
राजभाषा, संस्कृति एवं गजेटियर
60 सहायक संचालक 15600-39100 1 पद - 1
61 सहायक संचालक 9300-34800 1 पद 1 ----
62 सहायक संचालक 9300-34800 2 पद 1 1
63 शोध सहायक 9300-34800 2 पद 2 --
64 अनुवादक 5200-20200 2 पद 2 --
65 सहायक वर्ग-2 5200-20200 1 पद 1 --
66 सहायक वर्ग-3 5200-20200 1 पद 1 2
67 डाटा एन्ट्री ऑपरेटर 5200-20200 3 पद 1 --
68 भृत्य 4750-7440 1 पद 2 --
योग :- 9 पद 06 पद
कार्यालय संग्रहाध्यक्ष जिला पुरातत्व संग्रहालय, (रायपुर, बिलासपुर, जगदलपुर)
69 संग्रहाध्यक्ष 15600-39100 7 पद - 7
70 वरिष्ठ मार्गजर्शक 9300-34800 3 पद 3 --
71 कनिष्ठ मार्गदर्शक 5200-20200
4 पद 3 1
72 सहायक ग्रेड-2 5200-20200
7 पद 2 5
73 सहायक ग्रेड-3 5200-20200
7 पद 3 4
74 डाटा एन्ट्री ऑपरेटर 5200-20200
3 पद 3 --
75 भृत्य 4750-7440 10 पद 2 8
76 चौकिदार 4750-7440 11 पद 3 8
77 केयर टेकर 4750-7440 4 पद - 44
78 केयर टेकर जिलाध्यक्ष दर 12 पद 12 -
79 फर्राश/स्वीपर अंशकालीन जिलाध्यक्ष दर 4 पद 4 -
योग :- 68 पद 04 पद
महायोग :- 176 पद 24 पद
स्वीकृत सांख्येतर पदों की जानकारी
80 केयर टेकर 4750-7440 09 09 --
81 स्वीपर 4750-7440 01 01 --
82 केयर टेकर (नैमित्तिक) 4750-7440 06 06 --
83 उद्यान रेजा 4750-7440 03 03 --
84 उद्यान मजदूर 4750-7440 02 02 --
85 भृत्य 4750-7440 01 01 --
86 चौकिदार 4750-7440
योग :- 22 पद
22 पद
छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग
87 अध्यक्ष 25000 प्र.मा. 01 -- 1
88 सदस्य 18000 प्र.मा. 01 -- 1
89 उप सचिव 15600-39100 01 -- 1
90 लेखाधिकारी सह प्रशासनिक अधिकारी 15600-39100 01 -- 1
91 सहायक संचालक 15600-39100 01 -- 1
92 हिन्दी/छत्तीसगढ़ी अनुवादक 9300-34800 01 -- 1
93 अधीक्षक 9300-34800 01 -- 1
94 सहायक ग्रेड-1 5200-20200 01 -- 1
95 सहायक ग्रेड-2 5200-20200 02 -- 2
96 स्टेनोग्राफर 5200-20200 02 01 --
97 कम्प्यूटर ऑपरेटर 15600 संविदा 01 01 --
98 वाहन चालक 5200-20200 02 02 --
99 भृत्य 4750-7440 02 02 --
100 स्वीपर अंशकालीन 01 1 --
योग :- 20

विभाग के उद्देश्य
राज्य में कोई औपचारिक या विशेष नीति के स्थान पर राज्य की परम्पराओं-मान्यताओं का समावेश एवं उनके सवंर्धन के लिए सांस्कृतिक उद्देश्यों की परिकल्पना पर बल देते हुए राज्य की सांस्कृतिक गतिविधियों को नया आयाम दिया जा रहा है । जिसके अंतर्गत राज्य, अभिलेखीय एवं गैर अभिलेखीय परंपराओं के आधार पर संस्कृति को परिभाषित करेगा । राज्य, समुदायों के पारस्परिक संबन्धों को बनाये रखने एवं उनके मध्य समन्वय स्थापित करने का प्रयास करेगा, इसके अतिरिक्त सीमावर्ती पड़ोसी राज्यों के छत्तीसगढ़ राज्य के साथ सांस्कृतिक संबन्धों की नये परिप्रेक्ष्य में व्याख्या की जायेगी ।
छत्तीसगढ़ी राजभाषा एवं राज्य की अन्य बोलियों को प्रोत्साहित किया जावेगा । संस्कृति के ज्ञान का संचयन एवं उसका उपयोग समग्र रुप से एक सतत प्रक्रिया के रुप में देखा जायेगा । सांस्कृति गतिविधियों को बढ़ावा देने एवं राज्य के विभिन्न सांस्कृतिक संस्थाओं को एक सूत्र में बांधने हेतु एक अंतरसंकायी समिति का निर्माण किया जायेगा, जिसमें विभिन्न कलाओं एवं संकायों उच्च स्तरीय विशेषज्ञों का समावेश होगा । प्रदेश की आदिम संस्कृति के संरक्षकों और कलाकारों को दूरस्थ अंचलों से चिन्हांकित करने के परिणाममूलक प्रायस किए जाएंगे ।
स्मारकों का संरक्षण संस्कृति नीति का विशिष्ट अंग होगा । राज्य को एक जीवंत संग्रहालय की नई परिकल्पना में रख कर विभिन्न समुदायों की संस्कृति का प्रस्तुतिकरण, नीति का एक प्रमुख भाग होगा । इसके अतिरिक्त समुदायों के जैविक- सांस्कृतिक तत्व तथा उनके मध्य परिवेशीय अंतरसंबन्धो को नया आयाम देते हुये यह प्रयास किया जावेगा । संस्कृति को संपूर्ण जीवन का आवश्यक अंग मानकर उसका संवर्धन एवं परिवर्धन क्षेत्रीय कार्यक्रम, शोध-संगोष्ठी एवं विभिन्न उत्सवों के माध्यम से करना विभाग का ध्येय है ।

क्रियाकलाप -संस्कृति विभाग का कार्य प्रदेश की संस्कृति, साहित्य एवं पुरातत्व का संवर्धन करना है तथा उसके उत्तरोत्तर विकास के लिये कार्य करते रहना है । विभाग के क्रियाकलाप मुख्यतः निम्नानुसार है–

  • संस्कृति से संबंधित नीतिगत मामले व नीति निर्धारण कार्य ।
  • साहित्य एवं कला का विकास ।
  • सांस्कृतिक परम्परा का संरक्षण ।
  • ललित कला तथा लोक कला को प्रोत्साहन ।
  • छत्तीसगढ़ राज्य की कला, संस्कृति, परम्पराओं एवं जनभाषाओं का संरक्षण, संवर्धन, प्रोत्साहन एवं देश विदेश में उसका प्रचार-प्रसार ।
  • अर्थाभावग्रस्त कलाकारों/साहित्यकारों को पेंशन व आर्थिक सहायता ।
  • अशासकीय सांस्कृतिक संस्थाओं को प्रोत्साहन व आर्थिक सहायता ।
  • चयनित कलाकारों/साहित्यकारों/विद्वानों को सम्मानित करने का कार्य ।
  • कला, संस्कृति एवं ऐतिहासिक विषयों के दुर्लभ एवं प्रामाणिक ग्रंथों, दस्तावेजों, स्मृति चिन्हों का संग्रह, प्रकाशन, प्रदर्शन तथा संबंधित व्याख्यान, संगोष्ठियों आदि का आयोजन ।
  • पुराने अभिलेखों का संरक्षण, संवर्धन ।
  • ऐतिहासिक महत्व के स्मारकों का संरक्षण तथा संग्रहालयों का विकास ।
  • ऐतिहासिक स्मारकों को पर्यटन स्थल के रुप में विकसित करना ।
  • सिनेमा अधिनियम के तहत नये सिनेमागृहों को लायसेंस ।
  • शासकीय कार्य में हिन्दी एवं छत्तीसगढ़ राजभाषा का प्रयोग तथा उसके विकास संबंधी कार्य ।
  • शैक्षणिक संस्थाओं में हिन्दी के साथ-साथ राजभाषा के प्रयोग तथा उसके विकास संबंधी कार्य ।

विभाग की प्रमुख उपलब्धियां

  1. पुरखौती मुक्तांगन संकल्पना – राज्य की संस्कृति, परंपरा, पुरातत्व, पर्यावरण और जीव-सृष्टि की सन्निधि में विकास की कल्पना को साकार करने हेतु पुरखौती मुक्तांगन का निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ और राज्य के पारंपरिक शिल्पियों के द्वारा इसे सांस्कृतिक धरोहर के रुप में आकार प्रदान करने का संकल्प जीवन्त हुआ । पुरखौती मुक्तांगन रायपुर से लगभग 20 कि. मी. की दूरी पर ग्राम-उपरवारा में लगभग 200 एकड़ भूमि पर आकार ग्रहण कर रहा है ।
    महामहिम राष्ट्रपति महोदय द्वारा पुरखौती मुक्तांगन के प्रथम चरण का लोकार्पण किया गया, लोकार्पण समारोह में महामहिम राष्ट्रपति महोदय ने निर्माणाधीन इस योजना की सराहऩा की । राज्य की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के परिसर में माननीय मुख्यमंत्रीजी के हाथों पारंपरिक पौधों का रोपण कर शिल्प ग्राम निर्माण का संकल्प लिया गया । इस योजना के निर्माण कार्य हेतु ग्रामीण अभियांत्रिकी विभाग, अभनपुर एवं वन विभाग को क्रियान्वयन एजेन्सी के रुप में दायित्व सौंपा गया है ।
    लगभग 200 एकड़ परिक्षेत्र में फैला पुरखौती मुक्तांगन शैक्षणिक केन्द्र होगा जिसमें छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति, कलाशिल्प, प्राकृतिक संरचना और भौगोलिक परिदृश्य, पर्यावरण और जैव विविधता को प्रदर्शित करने हेतु विकास कार्य संपन्न कराया जाना है जिसका लोकार्पण महामहिम राष्ट्रपति के द्वारा किया गया । महामहिम द्वारा पुरखौती मुक्तांगन की इस अवधारणा की सराहना की गई है ।
    प्रथम चरण के विकास कार्य में भव्य प्रवेश द्वार, पर्यटन सूचना केन्द्र, पाथ-वे, माड़ियापथ, बैगा चौक, देवगुड़ी, छत्तीसगढ़ हाट, आभूषण पार्क, छत्तीस खम्भा चौक, जलपृष्ठीय रंगमंच, जनजातीय पारंपरिक शेड, मनोरंजन उद्यानगृह, सड़क एवं जल-निकास, लौह शिल्पियों की कार्यशाला एवं भित्तिचित्र निर्माण, सरगुजा की भित्तिचित्र का पारंपरिक जाली निर्माण, स्वतंत्रता सेनानियों की मूर्तियों का निर्माण, चारदीवारी निर्माण, छत्तीसगढ़ का मानचित्र का निर्माण जिसमें छत्तीसगढ़ के विभूतियों को दिखाया गया है । भू-दृश्य सौंदर्यीकरण एवं विद्युत साज-सज्जा आदि कार्य संपन्न किये जा चुके हैं ।
    इस प्रकार पुरखौती मुक्तांगन परिसर को अंतर्राष्ट्रीय स्वरुप प्रदान किये जाने एवं शैक्षणिक केन्द्र के रुप में स्थापित किये जाने का कार्य द्रुत गति से जारी है ।
  2. लोकोत्सव व पारंपरिक मेलों का विकास – राज्य की धरोहर, कला, संस्कृति एवं परंपराओं के प्रचार-प्रसार की दृष्टि से राजिम कुंभ, बस्तर दशहरा, शिवरीनारायण उत्सव, रायगढ़ में चक्रधर समारोह, सरगुजा में रामगढ़ उत्सव, बिलासपुर में बिलासा उत्सव, जांजगीर में जाज्वल्वदेव महोत्सव, सिरपुर में सिरपुर उत्सव, कांकेर में गढ़िया महोत्सव, करिया धुरवा मेला, रतनपुर उत्सव, मल्हार महोत्सव, खल्लारी महोत्सव, लोक मड़ई, डोंगरगढ़, भोरमदेव महोत्सव, ताला उत्सव आदि के आयोजन जिला प्रशासन व अन्य माध्यम से समन्वय कर संचालित किये जाते हैं ।
  3. राज्योत्सव का आयोजन – राज्य स्थापना दिवस 01 नवम्बर के अवसर पर राज्य के विभिन्न अंचल के स्थापित लोक कलाकारों, कला दलों के साथ-साथ नवोदित और अल्पज्ञात कलाकारों को प्रस्तुति हेतु अवसर उपलब्ध कराया गया । जिसमें राष्ट्रीय कलाकारों के साथ नये कलाकारों की पहचान, प्रोत्साहन एवं रचनात्मक स्वरुप की झलक प्रस्तुत हुई । राज्योत्सव के सात दिवसीय मुख्यसमारोह में प्रदेश के लोक कलाकारों के साथ-साथ देश के विभिन्न राज्यों के प्रतिष्ठित कलाकारों के द्वारा आकार्षक सांस्कृतिक प्रस्तुति दी गई । राज्योत्सव समापन दिवस को वायुसेना के जांबाज फाइटर प्लेन उड़ाकों द्वारा एरोबेटिक हवाई करतब के प्रदर्शन ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया ।




  4. छत्तीसगढ़ बहुआयामी संस्कृति संस्थान - राज्य के विविध सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रदर्शन, विकास, प्रचार-प्रसार, संकलन, कार्यशाला आदि के प्रत्यक्ष आयोजन से संबंधित संस्थान के विकास हेतु छत्तीसगढ़ बहुआयामी सांस्कृतिक संस्थान के गठन किया गया है । संस्थान में ख्यातिप्राप्त साहित्यकारों, कलाकारों की एक अंतःसंकायी समिति होगी । साथ ही विविध कलाओं एवं संकायों से चयनित उच्चस्तरीय विशेषज्ञ सम्मिलित होंगे । यह केन्द्र समुदायों के विशिष्ट सांस्कृतिक क्रियाक्लापों को सर्वत्र प्रोत्साहित करेगा । इस योजना को साकार करने के उद्देश्य से आडिटोरियम, मुक्ताकाश मंच, आर्ट गैलरी आदि तैयार किया जाना है । ‘बहुआयामी संस्कृति संस्थान’ के निर्माण हेतु राजधानी के मध्य पंडरी में 4.8 एकड़ भूमि उपलब्ध हो चुकी है । इस सांस्कृतिक परिसर के निर्माण हेतु देश भर के अनुभवी वास्तुविदों से प्राप्त प्रस्तावों के माध्यम से इसकी अवधारणा तथा स्वरुप पर निर्णय लिया गया है तथा तदनुसार शीघ्र कार्य आरंभ किया जावेगा ।
  5. प्रकाशन –
    • चक्रधर समारोह की रजत जयंती वर्ष पर सचित्र कैलेण्डर का प्रकाशन किया गया । (सितम्बर 09)
    • विभागीय वार्षिक शोध पत्रिका "कोसल" अंक-2 का प्रकाशन किया गया । (नवम्बर 09)
    • हांफ नदी घाटी का पुरातत्वीय सर्वेक्षण के प्रतिवेदन का प्रकाशन किया गया । (नवम्बर 09)
    • पर्यटन पर केन्द्रित विभागीय पत्रिका "बिहनिया" अंक-7 का प्रकाशन किया गया । (जनवरी 2010)
    • स्वतंत्रता दिवस, राज्योत्सव, राज्य दिवस आदि विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन पर ब्रोशर का प्रकाशन कराया गया ।
    • "छत्तीसगढ़ की स्थापत्य कला सरगुजा के विशेष संदर्भ में" का प्रकाशनाधीन है ।
  6. ग्रंथालय - संस्कृति विभाग के अंतर्गत संचालित महंत सर्वेश्वरदास ग्रंथालय को राज्य स्तरीय ग्रंथालय का दर्जा दिया गया है । ग्रंथालय में ई-लाईब्रेरी के रुप में विकसित किया जा रहा है । इस ग्रंथालय में इतिहास, पुरातत्व, नृतत्व शास्त्र, लोक प्रशासन, हिन्दी साहित्य, पत्रकारिता, पर्यटन एवं कम्प्यूटर आदि के अतिरिक्त हिन्दी, अंग्रेजी तथा संस्कृत साहित्य से संबंधित ग्रंथ तथा गजेटियर उपलब्ध हैं । ग्रंथालय में प्रतियोगी परीक्षाओं के छात्र-छात्राओं के अध्ययन हेतु पृथक से अध्ययन कक्ष की सुविधा उपलब्ध कराई गई है । ग्रंथालय का आधुनिकीकरण कर राष्ट्रीय पुस्तकालय स्तर का बनाया जा रहा है जिसके अंतर्गत लिब्सिस सॉफ्टवेयर कंपनी, कलकत्ता से सम्पर्क कर पुस्तकालय में सॉफ्टवेयर लगवाने का कार्य प्रथम चरण पर क्रियान्वित है जिससे पाठकों को पुस्तकें पढ़ने, ढूढने में विशेष सहायता मिल सकेगी ।
  7. कला एवं संस्कृति
    प्रदेश की संस्कृति एवं साहित्य के संरक्षण व संवर्धन हेतु विभागीय नीति के अनुरुप कार्यक्रम तैयार कर गतिविधियों का संचालन विभाग द्वारा किया जाता है, जिससे समुदायों के बीच पारंपरिक संबन्धों को बनाये रखने में, उन्हें विकसित करने में, उनके जीवन, उनकी कलाओं को उत्प्रेरित किया जा सके । स्थानीय समुदायों की अबाध सांस्कृतिक परम्पराओं की पहचान, मान्यता देना, पुनर्जीवित करना, दस्तावेजीकरण, प्रस्तुति एवं उनका प्रचार-प्रसार किया जा रहा है । साथ ही छत्तीसगढ़ के अद्वितीय सांस्कृतिक वैविध्य एवं विशिष्ट पहचान को परिभाषित कर, उसके सीमावर्ती पड़ोसी राज्यों तथा सांस्कृतिक प्रदेशों के साथ संबंध व विनिमय स्थापित किया जा रहा है । राज्य की समृद्ध जनजातीय परंपरा के संरक्षण एवं परिवर्धन हेतु विभिन्न कार्यक्रम, जिसमें जनजातीय रहन-सहन, तौर तरीके, रीति-रिवाज, लोक नृत्य, गायन एवं अन्य परंपराओं को बनाये रखने हेतु भी कार्य किया गया है । इस हेतु विभागीय क्रियाकलाप के साथ-साथ साहित्य, संस्कृति और कला के क्षेत्र में कार्यरत स्वायत्तशासी एवं निजी क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाओं को आर्थिक सहायता दी गई है । विभाग के अन्तर्गत "छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग", "स्वामी विवेकानंद विश्व प्रबुद्ध संस्थान", "पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी सृजन पीठ" एवं "छत्तीसगढ़ सिंधी साहित्य संस्थान" गठित है, जिसके माध्यम से सांस्कृतिक एवं साहित्यिक गतिविधियों के विकास एवं संवर्धन की दिशा में हो रहे कार्यों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है ।
  8. आयोजन एवं उत्सव
    राज्य, नयी संस्थाओं/उत्सवों को प्रस्थापित करने के बजाय अस्तित्वमान पृष्ठभूमि वाले उत्सवों/संस्थाओं को प्रोत्साहित करता है ताकि राज्य की पारंपरिक संस्कृति अविच्छिन्न बनी रहे और समाज-संस्कृति के विभिन्न क्षेत्रों में अंतःसंकायी संवाद कायम रहे । इस तारतम्य में विभाग द्वारा निम्नलिखित कार्यक्रम आयोजित किये गए/सहयोग प्रदान किया गया –
    • गौतम बुद्ध के जीवनवृत्त पर आधारित महानाट्य "तथागत" सांस्कृतिक कार्यक्रम । (जून 09)
    • महाकवि कालिदास की अमर कृति "मेघदूत" की प्रस्तुति । (जून 09)
    • शास्त्रीय रागों पर आधारित ‘पावस-प्रसंग’ का आयोजन, साईंस कालेज सभागार, रायपुर में भक्तिपूर्ण गीतों का सांस्कृतिक कार्यक्रम । (जुलाई 09)
    • "वो जब याद आए" स्व. मोहम्मद रफी की स्मृति पर संगीतमय आयोजन । (जुलाई 09)
    • स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर "जश्न ए आजादी" कार्यक्रम का आयोजन । (अगस्त 09)
    • तबला चौपाल "नाद-निनाद" का आयोजन । (अगस्त 09)
    • शास्त्रीय संगीत के युवा कलाकारों की प्रस्तुति "साधना महोत्सव" तथा पांच दिवसीय नाट्य समारोह "रंगोत्सव 2009" का आयोजन । (दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, नागपुर) । (अगस्त 09)
    • अन्य राज्यों में राज्य के कलाकारों की प्रस्तुति के क्रम में उड़ीसा दशहरा पूजा, कुल्लु दशहरा, हिमाचल प्रदेश, लोकरंग उत्सव, जयपुर । (अक्टूबर 09)
      कास्मो, ट्रेड एण्ड बिल्ड फेयर में सांस्कृतिक कार्यक्रम (अक्टूबर 09)
    • बिलासपुर स्वदेशी मेला में कार्यक्रम । (अक्टूबर 09)
      राज्योत्सव 2009 का आयोजन । (नवम्बर 09)
    • अन्य राज्यों के कलाकारों की लोक प्रस्तुति । (दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, नागपुर) । (नवम्बर 09)
      राज्य दिवस 2009, नई दिल्ली में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन । (नवम्बर 09)
    • सफर मुक्ताकाश का आयोजन – राज्य की मंचीय प्रतिभाओं तथा चित्रकारों को नियमित अवसर प्रदान कर राजधानी में सुधि नागरिकों की रूचि और आग्रह के अनुरूप प्रत्येक माह के दूसरे तथा चौथे शनिवार को आयोजित सफर मुक्ताकाश के अंतर्गत अप्रैल 09 से अब तक 18 नाटकों तथा 18 लोक गायकों का गायन प्रस्तुत कराया गया है ।
  9. संगोष्ठी एवं प्रदर्शनी अंतः संकायी संवाद तथा स्थानीय समुदायों के सहनिर्देशित पहल से सांस्कृतिक कार्यक्रमों का क्रियान्वयन करने के उद्देश्य से निम्नानुसार आयोजन किए गए -
    • शहीद राजगुरु पर संगोष्ठी का आयोजन । (अगस्त 09)
    • शहीद वीरनारायण सिंह पर संगोष्ठी का आयोजन । (दिसम्बर 09)
    • स्वामी विवेकानंद पर केन्द्रित संगोष्ठी का आयोजन । (2010)
    • इसी प्रकार सांस्कृतिक परंपराओं के प्रचार-प्रसार तथा मूल स्थान व निर्धारित स्थानों पर प्रदर्शनों की संकल्पना को क्रियान्वित करने हेतु राज्य की परंपराओं तथा सांस्कृतिक व कलात्मक संपदा का निम्नानुसार प्रदर्शन जनजागरुकता के उद्देश्य से किया गया/कराया जा रहा है –

    • राज्योत्सव 2009 के अवसर पर लोक नृत्यों पर आधारित चित्रों की प्रदर्शनी । (नवम्बर 2009)
    • सफर मुक्ताकाश के अंतर्गत अप्रैल 2009 से अब तक 25 चित्रकारों की प्रदर्शनी का आयोजन किया गया । इन प्रदर्शनियों में पिता-पुत्र, पिता-पुत्री, माता-पुत्री, पति-पत्नी चित्रकारों की जुगलबंदी विशेष उल्लेखनीय रही ।
  10. लोक शिल्पियों की कार्यशाला सह प्रशिक्षण
    आकार 2007’ प्रशिक्षण शिविर के अंतर्गत मृदा शिल्प, ढोकरा शिल्प, मधुबनी चित्रकला, फड़ चित्रकला, जरदोजी कला, पट्ट चित्रकला, काष्ठ शिल्प, भित्ति चित्रकला के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शिल्प गुरुओं द्वारा बड़ी संख्या में प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण दिया गया । रायपुर के साथ-साथ राजिम-नवापारा तथा बिलासपुर में भी आयोजित किया गया । इन शिविरों में शास्त्रीय नृत्यों का प्रशिक्षण भी दिया गया ।
  11. राजभाषा
    राज्य की संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु संस्कृति निति के अनुरुप सांस्कृतिक गतिविधियों को आयाम प्रदान किया जा रहा है । इसके अंतर्गत छत्तीसगढ़ के विभिन्न समुदायों के सांस्कृतिक विकास के लिए कला एवं जीवन, मौखिक एवं लिखित परम्परा के बीच में अन्तर्सबंध की पहचान, उनके अभिलेखन, प्रदर्शन, प्रकाशन एवं प्रचार करने का प्रयास किया गया है तथा समुदायों के बीच प्रचलित संस्कृति को प्रोत्साहित करने एवं उसे विकसित करने में राज्य के संस्कृति विभाग द्वारा एक उत्प्रेरक की भूमिका का सफल निर्वहन किया जा रहा है । तद्नुसार विभागीय योजनान्तर्गत छत्तीसगढ़ अंचल के लोक पारंपरिक उत्सवों, साहित्यिक आयोजनों एवं संगोष्ठियों हेतु चालू वित्तीय वर्ष में कुल 56 अशासकीय संस्थाओं को अनुदान राशि रु. 64,38,516/- तथा कुल 54 ख्यातिप्राप्त अर्थाभावग्रस्त साहित्यकारों/कलाकारों को मासिक आर्थिक सहायता राशि रु. 8,46,000/- तथा साहित्यकार एवं कलाकार की लम्बी बीमारी दुर्घटना या दैवी विपत्ति में तत्काल सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से संचालित योजनान्तर्गत कलाकार कल्याण कोष से कुल 07 हितग्राहियों को राशि रु. 1,05,000/- प्रदान किये गये हैं ।

    छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग
    छत्तीसगढ़ी को राज्य की राजभाषा का दर्जा प्रदान कर छत्तीसगढ़ी के प्रचलन, विकास एवं राजकाज में उपयोग हेतु समस्त उपाय करने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा "छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग" की स्थापना की गई है । छत्तीसगढ़ के 15 वरिष्ठ साहित्यकारों को उनकी छत्तीसगढ़ी साहित्य के प्रति सेवा हेतु ‘छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग सम्मान 2009’ से सम्मानित किया गया । कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय में पी.जी. डिप्लोमा इन फंक्शनल छत्तीसगढ़ी का पाठ्यक्रम प्रारंभ कराया गया । छत्तीसगढ़ी और सरगुजिहा के बीच अंतरसंबंध विषय पर अंबिकापुर मे संगोष्ठी का आयोजन किया गया । इसी प्रकार "माई कोठी" योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ एवं छत्तीसगढ़ी में लिखे साहित्य का एकत्रीकरण किया जा रहा है ।

    विवेकानन्द विश्व प्रबुद्ध संस्थान

    स्वामी विवेकानन्दजी ने कोलकाता के पश्चात् अपने जीवन का सर्वाधिक समय रायपुर में व्यतीत किया । उनके जीवनकाल को स्मरणीय बनाने हेतु विवेकानन्द विश्व प्रबुद्ध संस्थान की स्थापना की गयी है, जिसके अंतर्गत स्वामी विवेकानन्दजी के विचारों के अनुरुप अंतर्राष्ट्रीय संबंध भारत दर्शन, प्रबंधशास्त्र, युवाकल्याण एवं ग्रामीण विकास जैसे विषयों पर अध्ययन एवं शोध कार्य संचालित किया जाना प्रस्तावित है ।

    पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी सृजनपीठ, भिलाई
    छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग के अंतर्गत राष्ट्रभाषा हिन्दी के महान साहित्यकार एवं छत्तीसगढ़ की पावन धरती के माटी पुत्र डॉ. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी जी की पावन स्मृति में साहित्यिक संस्था सृजनपीठ कार्यरत है । इस संस्थान ने अपनी राष्ट्रीय गतिविधियों से अब पूरे देशभर के साहित्यकारों में अपनी अपनी पहचान और सम्मानजनक स्थान बना लिया है । 27 मई 2009 को बख्शीजी की जयंती के अवसर पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय साहित्यकार सम्मेलन भिलाई के अग्रसेन भवन में आयोजित किया गया । 16 अगस्त 2009 को डॉ. त्रिलोकीनाथ क्षत्रिय की ‘अज्जु’ कहानी पर, 28 नवम्बर 2009 को स्व. कवि श्री इंद्र बहादुर खरे की कृति के ‘गीत’ पर एवं 30 जनवरी को श्रीमती पदमा जोशी की कृति ‘अगले मोड़’ पर परिचर्चा गोष्ठी आयोजित की गई ।

    छत्तीसगढ़ सिन्धी साहित्य संस्थान, रायपुर

    छत्तीसगढ़ शासन, संस्कृति विभाग द्वारा संचालित छत्तीसगढ़ सिन्धी साहित्य संस्थान द्वारा अब तक कुल 35 गतिविधियों/कार्यक्रमों का आयोजन किया जा चुका है । संस्थान द्वारा बच्चों को सिंधी भाषा की शिक्षा देने हेतु रायपुर के विभिन्न सिंधी बाहुल्य क्षेत्रों में तीन केन्द्र वहां की पूज्य सिंधी पंचायतों के सहयोग से संचालित हैं । संस्थान द्वारा सिंधी भाषा एवं संस्कृति के उत्थान हेतु विभिन्न क्रियाकलाप समय-समय पर शासन के सहयोग से संचालित किए जाते रहे हैं ।
  12. पुरातत्व
    पुरातत्वीय स्थलों का संरक्षण एवं विकास –
    विभाग द्वारा राज्य में फैली पुरासम्पदा के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में पहल करते हुए महत्वपूर्ण संरक्षित पुरातत्वीय स्मारकों के परिसर का उन्नयन एवं विकास कार्य तथा स्मारकों को पर्यटन के अनुरुप विकसित करने का कार्य प्रारंभ किया गया । इसके अंतर्गत अनुरक्षण कार्य, फोटोग्राफी डॉक्यूमेंटेशन तथा मॉडलिंग के तहत प्रतिकृतियों का निर्माण एवं प्रकाशन कार्य करवाया गया । पुरातत्व से संबंधित संगोष्ठियां, प्रदर्शनी एवं राज्य भर में फैले प्रमुख संरक्षित स्मारकों का अनुरक्षण एवं रासायनिक संरक्षण सम्पन्न किए गये हैं ।
    अनुरक्षण कार्य –
    राज्य संरक्षित स्मारक स्थलों की सुरक्षा, सुदृढ़ता तथा संवर्धनात्म कार्यों के अंतर्गत शिव मंदिर (गढ़धनोरा, बस्तर), शिव मंदिर (पलारी, दुर्ग), फणिकेश्वरनाथ मंदिर, (फिंगेश्वर, रायपुर), सिरपुर के अंदर चौकीदारों के क्वाटर्स का निर्माण कार्य, शिव मंदिर समूह (कलचा भदवाही), जिला सरगुजा में बाउण्ड्रीवाल का कार्य, शिवमंदिर हर्राटोला, बेलसर, जिला सरगुजा में बाउणड्रीवाल एवं एप्रोच का कार्य, सूर्य मंदिर, बोरजाटीला, डीपाडीह में बाउण्ड्रीवाल एवं अनुरक्षण का कार्य प्रगति पर है ।
    रासायनिक संरक्षण –
    राज्य संरक्षित स्मारक के अंतर्गत डीपाडीह, जिला सरगुजा में सामत-सरना तथा उरांव टोला समूह में स्थित स्मारकों एवं पुरावशेषों का रासायनिक संरक्षण कार्य पूर्ण किया जा चुका है । देवरानी-जेठानी मंदिर, ताला, जिला बिलासपुर, जगन्नाथ मंदिर, खल्लारी, जिला महासमुन्द, भोरमदेव मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन ईंट निर्मित मंदिर तथा पाषाण प्रतिमा, सिरपुर, जिला महासमुन्द स्थित आनंदप्रभु कुटी विहार एवं स्वास्तिक विहार, शिवमंदिर, हर्राटोला, बेलसर, सतमहला मंदिर समूह, कलचा भदवाही, जिला सरगुजा, ईंट निर्मित मंदिर, नवागांव, जिला रायपुर तथा शिवमंदिर, घटियारी, जिला राजनांदगांव का रासायनिक संरक्षण कार्य प्रगति पर है ।
  13. पुरातत्वीय उत्खनन
    वर्ष 2008-09 हेतु विभाग को भारत सरकार से तीन स्थलों के उत्खनन हेतु अनुमति प्राप्त हुई है, जिसके अनुसार पचराही, जिला कबीरधाम, महेशपुर, जिला सरगुजा एवं सिरपुर, जिला महासमुंद में उत्खनन का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है ।
    • सिरपुर उत्खनन से 79 कास्य प्रतिमाएं, सिरपुर के सोमवंशी शासक तीवरदेव का 1 एवं महाशिवगुप्त बालार्जुन के 3 ताम्रपत्र सेट प्राप्त हुए हैं । अब तक सिरपुर में 32 प्राचीन टीलों पर प्राचीन संरचनाएं उत्खनन से प्रकाश में आए हैं । उत्खनन में पहली बार सिरपुर में मौर्य कालीन बौद्ध स्तूप प्राप्त हुआ है । उत्खनन के साथ-साथ अनावृत्त संरचनाओं पर अनुरक्षण कार्य भी करवाया जा रहा है । सिरपुर में अनुरक्षण एवं विकास कार्य कराए जा रहे हैं ।
    • पचराही उत्खनन से प्राचीन मुद्राएं, पाषण प्रतिमाएं एवं प्राचीन मंदिरों के भग्नावशेष प्रकाश में आये हैं । उत्खनन के दौरान प्रागैतिहासिक काल, कल्चुरी काल, फणिनागवंश तथा मुगल काल के प्रमुख अवशेष प्राप्त हुए हैं । इस उत्खनन में छत्तीसगढ़ में पहली बार कवर्धा के फणी नागवंश का 1 स्वर्ण एवं 3 रजत मुद्रा प्रकाश में आए हैं , जिससे छत्तीसगढ़ के राजनैतिक इतिहास को एक नई दिशा मिली है । इसके अतिरिक्त कल्चुरि राजा जाजल्यदेव तथा मुगलकालीन 12 ताम्र मुद्राएं प्रकाश में आई है । उत्खनन से ज्ञात होता है कि पचराही प्रागैतिहासिक काल से लेकर मुगल काल तक सतत् रुप से मानव जाति का विचरण स्थली रहा है । मुख्यमंत्रीजी ने विशेष रुचि लेकर पचराही प्रवास के दौरान उत्खनन कार्य के संदर्भ में विभाग के प्रयासों और उपलब्धियों को रेखांकित कराया है ।
    • महेशपुर उत्खनन से लगभग 7वीं सदी ईसवीं के सोमवंशी कला शैली के ईंटों से निर्मित ताराकृति तल योजना युक्त शिव मंदिर की संरचना ज्ञात हुई है । दक्षिण कोसल के सोमवंशी कला शैली के ताराकृति तलयोजना युक्त मंदिरों में यह विशाल है । परिसर में अन्य 4 लघु शिवमंदिर भी अनावृत्त किये गए हैं । यहां से प्रमुख रुप से स्थापत्य खंड, कृष्ण कथा तथा अन्य प्रतिमाओं के कलात्मक शिल्प प्रकाश में आए हैं । भग्न अभिलेख का एक अंश भी प्राप्त हुआ है । प्राप्त अवशेषों में ब्रिटिश कालीन 33 ताम्र मुद्राएं भी सम्मिलित हैं ।
    • बिलासपुर जिले में शिवनाथ नदी के मध्य स्थित मदकूदीप में उत्खनन कार्य तथा रायपुर जिले में खारुन नदी के किनारे तरीघाट के टीलों में पुरातत्वीय तकनीकी सर्वेक्षण कार्य हेतु अनुमति प्राप्त हो गई है । इन कार्यों से राज्य की पुरातत्वीय संपदा और प्राचीन इतिहास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियों की प्रबल संभावना है ।
  14. संग्रहालय
    • अतीत के अवशेषों के संरक्षण, प्रदर्शन, अध्ययन तथा प्राचिन ज्ञान-विज्ञान के स्त्रोतों के अनुसंधान के लिए संग्रहालयों की मह्त्वपूर्ण भूमिका है । राज्य शासन के विभिन्न संग्रहालयों के उन्नयन तथा नवीन संग्रहालयों की स्थापना के लिए विशेष रुप से सचेष्ट है । अंबिकापुर, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, कोरिया एवं कांकेर में जिला पुरातत्व संग्रहालय बनाया जा रहा है । महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय, रायपुर को राज्य स्तरीय संग्रहालय के समकक्ष उन्नयन किया गया है । दीर्घाओं में तकनीकी ढंग से साज-सज्जा तथा प्रदर्शन पर ध्यान दिया गया है ।
    • प्राचीन नगरी ‘सिरपुर’ के उत्खनन से प्राप्त पुरावशेषों की सुरक्षा एवं प्रदर्शन हेतु संग्रहालय निर्माण कार्य की योजना प्रस्तावित है । योजना के अंतर्गत स्थल का अधिपत्य प्राप्त कर बाउण्ड्रीवाल निर्माण का कार्य पूर्ण हो चुका है । सिरपुर संग्रहालय भवन निर्माण हेतु कार्ययोजना पर कार्यवाही की जा रही है । साथ ही नव उत्खनित स्थल पचराही’ जिला कबीरधाम तथा ‘महेशपुर’ जिला सरगुजा में स्थानीय संग्रहालय निर्माण की योजना पर कार्यवाही की जा रही है ।
    • इसके साथ-साथ जिला पुरातत्व संग्रबहालय, जगदलपुर के नवीन भवन निर्माण का कार्य प्रगति पर है । इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ के अंतर्गत स्थापित पुरातत्व संग्रहालय में विभागीय व्यय से रसायनिक कार्य करवाया जा रहा है । राज्य संरक्षित स्मारक स्थल देवरानी-जेठानी मंदिर परिसर में पर्यटन दृष्टि से स्थानीय संग्रहालय भवन का निर्माण तथा पुरावशेषों का प्रदर्शन किया गया है ।
    • राजनांदगांव, भोरमदेव तथा कोरबा में जिला पुरातत्व संग्रहालयों का निर्माण कर उन्हें प्रदर्शन कर जनसामान्य के अवलोकन हेतु खोल दिया गया है । इसके अतिरिक्त पंचायत स्तर पर ग्राम पासीद तथा मठपुरैना में भी स्थानीय संग्रहालयों का निर्माण किया गया है । जिला मुख्यालय कोरबा में नगर निगम, कोरबा के सहयोग से पुरावशेषों की सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए वृहद संग्रहालय का निर्माण किया जा रहा है ।
  15. मॉडलिंग
    राज्य की महत्वपूर्ण प्राचीन कलात्मक प्रतिमाओं की प्लास्टर प्रतिकृति प्रचार-प्रसार एवं जागरुकता की दृष्टि से तैयार कर उचित मूल्य पर विक्रय हेतु विभाग द्वारा उपलब्ध कराई जाती है । इस क्रम में पूर्व की प्रचलित प्रतिकृतियों के अतिरिक्त सिरपुर से प्राप्त गणेश, प्रतीक्षारत नायिका एवं युगल दम्पति प्रतिमाओं का प्लास्टर कास्ट सांचा तैयार किया गया है । तथा लगभग 600 प्रतिकृतियों का निर्माण किया गया है । सथा ही पुरावशेषों तथा प्रतिकृति निर्माण के प्रति जागरुकता विकसित करने की दृष्टि से शासकीय महिला महाविद्यालय में प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन कर 60 प्रशिक्षुओं को प्लास्टर प्रतिकृति निर्माण में प्रशिक्षित किया गया ।
  16. अभिलेखागार
    छत्तीसगढ़ से संबंधित ऐतिहासिक एवं महत्वपूर्ण स्थायी प्रकृति के अभिलेखों के अधिग्रहण-स्थान्तरण के अन्तर्गत मध्यप्रदेश से अभिलेखों की लगभग 3000 पृष्ठ छायाप्रतियाँ अभिलेखागार में लायी जा चुकी हैं, साथ ही लगभग 1500 अभिलेखों को चिन्हांकित किया जा चुका है । इसके अतिरिक्त अति महत्वपूर्ण अभिलेखों को चिन्हांकित कर उनकी लगभग 100 छायाप्रतियाँ प्राप्त किए जाने हेतु मध्यप्रदेश राज्य अभिलेखागार को लेख किया गया है । मूल अभिलेखों के हस्तान्तरण बाबत प्रयास किए जा रहे हैं । राष्ट्रीय पाण्डुलिपि मिशन भारत सरकार द्वारा अभिलेखागार के माध्यम से छत्तीसगढ़ के समस्त जिलों में पाण्डुलिपियों का सर्वेक्षण जिला प्रशासन के सहयोग से प्रारम्भ किया गया था । इसके अन्तर्गत
    महत्वपूर्ण पाण्डुलिपियों को चिन्हांकित तथा सूचीकृत किया गया है । प्रथम चरण का सर्वेक्षण कार्य संपन्न हो चुका है । मिशन की ओर से द्वितीय चरण की पुनरीक्षित रुप रेखा प्राप्त होते ही सर्वेक्षण में प्रगति जारी रहेगी । उसके पश्चात् उनके संरक्षण हेतु संधारकों के यहां अथवा उनसे लेकर एक विशेष स्थान अथवा राज्य अभिलेखागार में वैज्ञानिक विधियों द्वारा संरक्षित किया जाएगा । अन्य राज्यों की भाँति छत्तीसगढ़ राज्य अभिलेखागार भवन हेतु प्रयास तेज कर दिए गए हैं, इसके अन्तर्गत छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल को डीपीआर तैयार करने हेतु लेख किया गया है । इस वर्ष 2 जिला मुख्यालयों के स्थायी अभिलेखों का निरीक्षण/सर्वेक्षण किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है ।
  17. राजिम कुंभ
    राज्य के त्रिवेणी संगम राजिम जहाँ प्रतिवर्ष माघ पूर्णिमा को पारंपरिक रुप से मेले का आयोजन होता था, उसे नियमित स्वरुप प्रदान कर राजिम कुंभ मेला समिति गठित किया गया है । राज्य के संस्कृति के विकास एवं पर्यटन को प्रोत्साहन प्रदान करने हेतु राजिम में शंकराचार्य, महामंडलेश्वर, मठाधीश, संत-महात्माओं एवं जन प्रतिनिधियों के मार्गदर्शन में कुंभ मेले का आयोजन किया जाता है । इस अवसर पर देश के कोने-कोने से साधु-संतों का समागम राजिम में होता है । छत्तीसगढ़ का प्रयाग राज में इस आयोजन से संस्कृति, धरोहर, लोक परंपरा एवं कला को एक नया आयाम जुड़ा है । इस दौरान राष्ट्रीय स्तर व आंचलिक कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और साहित्यिक संगोष्ठी एवं विभागीय प्रदर्शनीय का आयोजन पूरे पंचकोशी क्षेत्र में किया जाता है । इस वर्ष राजिम कुंभ मेले के समापन समारोह में सांस्कृतिक पंचांग का विमोचन माननीय मुख्यमंत्रीजी द्वारा किया गया ।

संचालनाय संस्कृति पुरातत्व, राजभाषा, अभिलेखागार एवं संग्रहालय बजट प्रावधान की जानकारी वित्तीय वर्ष 2009-10

क्र. बजट का मद आयोजनेत्तर आयोजना योग
मांग संख्या 26 लेखा शीर्ष 2202 सामान्य शिक्षा
1 102 आधुनिक भारतीय भाषाओं और साहित्य का संवर्धन 40.56 62.85 103.41
योग 2202 40.56 62.85 103.41
मांग संख्या 26 लेखा शीर्ष 2205 कला और संस्कृति
1 101 – ललित कलाओं की शिक्षा 2.40 150.00 152.40
2 102 – कलाओं एवं संस्कृति का संवर्धन 171.00 0 171.00
3 103 – पुरातत्व 194.94 178.40 373.34
4 104 – अभिलेखागार 16.98 0 16.98
5 105 – सार्वजनिक पुस्तकालय 0.00 41.00 41.00
6 107 – संग्रहालय 272.04 0 272.04
7 800 – अन्य व्यय 1.00 325.00 326.00
योग 2205 658.36 694.40 1352.76
मांग संख्या 26 लेखा शीर्ष 3454 जनगणना सर्वेक्षण एवं साख्यिकी
1 110 – गजेटियार और सांख्यिकी विवरण 0 20.00 20.00
योग 3454 0 20.00 20.00
698.92 777.25 1476.17
मांग संख्या 41 लेखा शीर्ष 2205 कला और संस्कृति
1 107 – संग्रहालय 0 250.00 250.00
योग मांग संख्या 41 0 250.00 250.00
मांग संख्या 38 लेखा शीर्ष 2205 कला और संस्कृति, 4202 – शिक्षा, खेल, कला और संस्कृति पर पूंजी परिव्यय (बारहवें वित्त अयोग की अनुशंसा के अंतर्गत प्राप्त सहायता अनुदान)
1 2205 – 103 – पुरातत्व 0 150.00 150.00
2 4202 – 106 – संग्रहालय 0 100.00 100.00
योग मांग संख्या 38 0 250.00 250.00
वित्तीय वर्ष 2009-10 में प्रथम अनुपूरक में प्राप्त राशि की जानकारी
मांग संख्या 38 लेखा शीर्ष 2205 कला और संस्कृति, 4202 – शिक्षा, खेल और संस्कृति पर पूंजी परिव्यय (बारहवें वित्त अयोग की अनुशंसा के अंतर्गत प्राप्त सहायता अनुदान)
1 2205 – 103 – पुरातत्व 0 51.18 51.18
योग 0 51.18 51.18
कुल योग मांग संख्या 38 0 301.18 301.18