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छत्तीसगढ़ शासन
संस्कृति विभाग

वार्षिक प्रशासकीय प्रतिवेदन
वर्ष 2012-2013




विभाग का नाम संस्कृति विभाग
मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल
संसदीय सचिव श्री युद्धवीर सिंह जूदेव
सचिव श्री के. डी. पी. राव
उपसचिव श्री एन. के. भट्टर
अवर सचिव श्री मती दुर्गा देवांगन
संचालनालय
संचालक श्री एन. के. सुक्ल
उप संचालक श्री राहुल कुमार सिंह
उप संचालक श्री एस.बी. सतपाल
उप संचालक (वित्त) श्री सी. आर. साहनी
उप संचालक श्री एस.एस.सी. केरकेट्टा
उप संचालक श्री जे.आर. भगत
पुरातत्वीय अधिकारी डॉ. शिवाकांत बाजपेयी
मुख्य रसायनज्ञ डॉ. कामता प्रसाद वर्मा
विभाग के अधीनस्थ गठित इकाईयां
छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग
अध्यक्ष डॉ. दानेश्वर शर्मा
सचिव पद्मश्री डॉ. सुरेन्द्र दुबे
सदस्य श्री केदार सिंह परिहार
सदस्य सुश्री निर्मला तिवारी
पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी सृजन पीठ
अध्यक्ष डॉ. रमेन्द्रनाथ मिश्र
छत्तीसगढ़ सिंधी साहित्य संस्थान
अध्यक्ष श्री मुरलीधर माखीजा
विवेकानन्द विश्व प्रबुद्ध संस्थान


विभाग के उद्देश्य -
राज्य में कोई औपचारिक या विशेष नीति के स्थान पर राज्य की परम्पराओं-मान्यताओं का समावेश एवं उनके सवंर्धन के लिए सांस्कृतिक उद्देश्यों की परिकल्पना पर बल देते हुए राज्य की सांस्कृतिक गतिविधियों को नया आयाम दिया जा रहा है । जिसके अंतर्गत राज्य, अभिलेखीय एवं गैर अभिलेखीय परंपराओं के आधार पर संस्कृति को परिभाषित करेगा । राज्य, समुदायों के पारस्परिक संबन्धों को बनाये रखने एवं उनके मध्य समन्वय स्थापित करने का प्रयास करेगा, इसके अतिरिक्त सीमावर्ती पड़ोसी राज्यों के छत्तीसगढ़ राज्य के साथ सांस्कृतिक संबन्धों की नये परिप्रेक्ष्य में व्याख्या की जायेगी ।

छत्तीसगढ़ी राजभाषा एवं राज्य की अन्य बोलियों को प्रोत्साहित किया जावेगा । संस्कृति के ज्ञान का संचयन एवं उसका उपयोग समग्र रुप से एक सतत प्रक्रिया के रुप में देखा जायेगा । सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने एवं राज्य के विभिन्न सांस्कृतिक संस्थाओं को एक सूत्र में बांधने हेतु एक अंतरसंकायी समिति का निर्माण किया जायेगा, जिसमें विभिन्न कलाओं एवं संकायों के उच्च स्तरीय विशेषज्ञों का समावेश होगा । प्रदेश की आदिम संस्कृति के संरक्षकों और कलाकारों को दूरस्थ अंचलों से चिन्हांकित करने के परिणाममूलक प्रायस किए जाएंगे ।

स्मारकों का संरक्षण संस्कृति नीति का विशिष्ट अंग होगा । राज्य को एक जीवंत संग्रहालय की नई परिकल्पना में रख कर विभिन्न समुदायों की संस्कृति का प्रस्तुतिकरण, नीति का एक प्रमुख भाग होगा । इसके अतिरिक्त समुदायों के जैविक- सांस्कृतिक तत्व तथा उनके मध्य परिवेशीय अंतरसंबन्धो को नया आयाम देते हुये यह प्रयास किया जावेगा । संस्कृति को संपूर्ण जीवन का आवश्यक अंग मानकर उसका संवर्धन एवं परिवर्धन क्षेत्रीय कार्यक्रम, शोध-संगोष्ठी एवं विभिन्न उत्सवों के माध्यम से करना विभाग का ध्येय है ।

क्रियाकलाप -
संस्कृति विभाग का कार्य प्रदेश की संस्कृति, साहित्य एवं पुरातत्व का संवर्धन करना है तथा उसके उत्तरोत्तर विकाश के लिये कार्य करते रहना है । विभाग के क्रियाकलाप मुख्यतः निम्नानुसार है-

संस्कृति से संबंधित नीतिगत मामले व नीति निर्धारण कार्य ।
साहित्य एवं कला का विकास ।
सांस्कृतिक परम्परा का संरक्षण ।
ललित कला तथा लोक कला को प्रोत्साहन ।
छत्तीसगढ़ राज्य की कला, संस्कृति, परम्पराओं एवं जनभाषाओं का संरक्षण, संवर्धन, प्रोत्साहन एवं देश विदेश में उसका प्रचार-प्रसार ।
अर्थाभावग्रस्त कलाकारों/साहित्यकारों को पेंशन व आर्थिक सहायता ।
अशासकीय सांस्कृतिक संस्थाओं को प्रोत्साहन व आर्थिक सहायता ।
चयनित कलाकारों/साहित्यकारों/विद्वानों को सम्मानित करने का कार्य ।
कला, संस्कृति एवं ऐतिहासिक विषयों के दुर्लभ एवं प्रामाणिक ग्रंथों, दस्तावेजों स्मृति चिन्हों का संग्रह, प्रकाशन, प्रदर्शन तथा संबंधित व्याख्यान, संगोष्ठियों आदि का आयोजन ।
पुराने अभिलेखों का संरक्षण, संवर्धन ।
ऐतिहासिक महत्व के स्मारकों का संरक्षण तथा संग्रहालयों का विकास ।
ऐतिहासिक स्मारकों को पर्यटन स्थल के रुप में विकसित करना ।
सिनेमा अधिनियम के तहत नये सिनेमागृहों को लायसेंस ।
शासकीय कार्य में हिन्दी एवं छत्तीसगढ़ राजभाषा का प्रयोग तथा उसके विकास संबंधी कार्य ।
शैक्षणिक संस्थाओं एवं शासकीय कार्यों में हिन्दी के साथ-साथ छत्तीसगढ़ी के प्रयोग और विकास संबंधी कार्य ।

विभाग की प्रमुख उपलब्धियां

पुरखौती मुक्तांगन संकल्पना -
राज्य की संस्कृति, परंपरा, पुरातत्व, पर्यावरण और जीव-सृष्टि की सन्निधि में विकास की कल्पना को साकार करने हेतु पुरखौती मुक्तांगन का निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ और राज्य के पारंपरिक शिल्पियों के द्वारा इसे सांस्कृतिक धरोहर के रुप में आकार प्रदान करने का संकल्प जीवन्त हुआ । पुरखौती मुक्तांगन रायपुर से लगभग 20 कि. मी. की दूरी पर ग्राम-उपरवारा में लगभग 200 एकड़ भूमि पर आकार ग्रहण कर रहा है ।

माननीय राष्ट्रपति महोदय द्वारा पुरखौती मुक्तांगन के प्रथम चरण का लोकार्पण किया गया, लोकार्पण समारोह में माननीय राष्ट्रपति महोदय ने निर्माणाधीन इस योजना की सराहऩा की । राज्य की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के परिसर में माननीय मुख्यमंत्रीजी के हाथों पारंपरिक पौधों का रोपण कर शिल्प ग्राम निर्माण का संकल्प लिया गया । इस योजना के निर्माण कार्य हेतु ग्रामीण अभियांत्रिकी विभाग, अभनपुर, रायपुर एवं छत्तीसगढ़ पर्यटन मण्डल, रायपुर को क्रियान्वयन एजेन्सी के रुप में दायित्व सौंपा गया है ।

लगभग 200 एकड़ परिक्षेत्र में फैला पुरखौती मुक्तांगन शैक्षणिक केन्द्र होगा जिसमें छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति, कलाशिल्प, प्राकृतिक संरचना और भौगोलिक परिदृश्य, पर्यावरण और जैव विविधता को प्रदर्शित करने हेतु विकास कार्य संपन्न कराये जा रहे हैं जिसका लोकार्पण माननीय राष्ट्रपति के द्वारा किया गया । माननीय राष्ट्रपति महोदय द्वारा पुरखौती मुक्तांगन की इस अवधारणा की सराहना की गई है ।

प्रथम चरण के विकास कार्य में भव्य प्रवेश द्वार, पर्यटन सूचना केन्द्र, पाथ-वे, माड़ियापथ, बैगा चौक, देवगुड़ी, छत्तीसगढ़ हाट, आभूषण पार्क, छत्तीसगढ़ी चौक, जनजातीय पारंपरिक शेड, मनोरंजन उद्यानगृह, सड़क एवं जल-निकास, लौह शिल्पियों की कार्यशाला एवं भित्तिचित्र निर्माण, सरगुजा की भित्तिचित्र का पारंपरिक जाली निर्माण, स्वतंत्रता सेनानियों की मूर्तियों का निर्माण, चारदीवारी निर्माण, छत्तीसगढ़ का मानचित्र का निर्माण जिसमें छत्तीसगढ़ के विभूतियों को दिखाया गया है । भू-दृश्य सौंदर्यीकरण एवं विद्युत साज-सज्जा आदि कार्य संपन्न किये जा चुके हैं । साथ ही इस वर्ष पाथवे में फाइण्टेन एवं वाटरफॉल को प्रारंभ किया गया है । वर्तमान में पुरखौती मुक्तांगन में स्थापित पारंपरिक लोक नृत्यों के भ्रमण हेतु पाथवे का निर्माण तथा लाईट एवं साउड़ इफेक्ट का कार्य करवाया गया हैं एवं पुरखौती मुक्तांगन में मछली घर का निर्माण मत्स्य विभाग रायपुर (छ.ग.) द्वारा कराया जा रहा है । इसके अलावा राक गार्डन का निर्माण नोड़ल एजेंसी खनिज विभाग को बनाया गया है ।

माननीय संस्कृति मंत्री जी की घोषणा के अनुसार वर्ष में 4 बार लोक प्रसंग का कार्यक्रम प्रारंभ किया जाए । इसके तहत लोक प्रसंग उत्सव 4 बार आयोजित किया जा रहा है । जिसको यहां की जनता ने काफी सराहा है । इस वर्ष प्रमुख पर्यटक में से छत्तीगढ़ के माननीय मुख्यमंत्री, माननीय विधानसभा अध्यक्ष एवं माननीय संस्कृति मंत्री के साथ ही साथ पंजाब के माननीय उपमुख्यमंत्री श्री सुखवीर सिंह बादल रहें । इसी तरह अन्य गणमान्य नागरिकों का आगमन हुआ एवं उन्होंने पुरखौती मुक्तांगन के स्वरुप की प्रशंसा की है ।

वर्ष 2012-13 में पर्यटकों की संख्या 1,50,000 रही । पर्यटकों की प्रवेश शुल्क के रुप में शासन के खजाने में राजस्व के रुप में राशि रु.3.40 लाख जमा किए गए । इसी तरह अन्य गणमान्य नागरिकों का भी आगमन हुआ है एवं उन्होंने पुरखौती मुक्तागन के स्वरुप की प्रशंसा की गई । इस प्रकार पुरखौती मुक्तांगन परिसर को जो भारत में पर्यटन के साथ - साथ सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक केन्द्र के रुप में आकार ले रहा है ।

पुरातत्व -
पुरातत्वीय स्थलों का संरक्षण एवं विकास -
विभाग द्वारा राज्य संरक्षित स्मारकों तथा प्रदेश में फैली पुरातात्विक संम्पदा के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए वैज्ञानिक ढंग से उन्नत तकनीकों द्वारा उन्नयन एवं विकास कार्य सम्पादित किए जा रहे हैं । पुरातत्वीय पर्यटन की दृष्टि से पुरास्थलों को विकसित किए जाने का कार्य प्रारंभ किया गया है । जिसके अन्तर्गत संरचनात्मक एवं रसायनिक संरक्षण कार्य, पुरातात्विक छायांकन, डाक्यूमेन्टेशन, प्रतिकृतियों का निर्माण तथा पुरातात्विक राष्ट्रीय/राज्य स्तरीय संगोष्ठियों का आयोजन, सांस्कृतिक धरोहर के प्रति लोगों में जन-जागरुकता लाने के लिए भिन्न-भिन्न अवसरों पर प्रदर्शनियों का आयोजन एवं महत्वपूर्ण सांस्कृतिक विरासत से संबंधित विषयों पर महत्वपूर्ण प्रकाशन कार्य सम्पन्न किए गए हैं ।

पुरातत्वीय उत्खनन/सर्वेक्षण -

वर्ष 2012-13 हेतु विभाग को केन्द्र सरकार द्वारा राजिम, जिला गरियाबंद तथा ग्राम तरीघाट, जिला दुर्ग के उत्खनन की अनुज्ञप्ति प्राप्त हुई है । उत्खनन कार्य प्रारंभ किया जा रहा है ।
वर्ष 2012-13 के लिए केन्द्र सरकार द्वारा डमरु, जिला बलौदाबाजार-भाटापारा, के पुरातात्विक सर्वेक्षण के लिए अनुज्ञप्ति प्राप्त हुई है, जिसका कार्य प्रारंभ किया जा रहा है ।
विभाग द्वारा जोंक नदी का पुरातात्विक सर्वेक्षण कार्य किया जा रहा है । इसके अतिरिक्त सरगुजा जिले का तहसील स्तर से ग्रामवार सर्वेक्षण कार्य किया गया है ।
अनुरक्षण कार्य -
राज्य संरक्षित स्मारक शिव मंदिर डमरु जिला बलौदाबाजार-भाटापारा में जीर्णोद्धार एवं अनुरक्षण कार्य ।
राज्य संरक्षित स्मारक जगन्नाथ मंदिर खल्लारी जिला महासमुन्द में अनुरक्षण कार्य प्रस्तावित है ।
राज्य संरक्षित स्मारक कुलेश्वर मंदिर नवागांव (राजिम) जिला धमतरी में अनुरक्षण कार्य कराया गया है ।
उत्खनन स्थल पचराही साईट क्र. 04 एवं 05 में उत्खनन से प्राप्त स्मारकों का अनुरक्षण कार्य प्रस्तावित है ।
अनुदान -
जिला पुरातत्व संघों को दिये जाने हेतु वित्तीय वर्ष 2012-13 में जिला पुरातत्व संघ कांकेर को राशि रु. 50,000/- का अनुदान दिया जा चुका है तथा जिला पुरातत्व संग्रहालय कोरबा को भवन निर्माण हेतु राशि रु. 7.75 लाख एवं मजदूरी तथा अन्य व्यय हेतु राशि रु. 2.50 लाख, जिला पुरातत्व संग्रहालय अम्बिकापुर को भवन निर्माण हेतु राशि रु. 68.00 लाख, तथा शेष बजट राशि रु. 19.75 लाख में से जिला पुरातत्व संग्रहालय रायगढ़, धमतरी, जांजगीर-चांपा, कोरिया, राजनांदगांव, बालोद, सुकमा, सूरजपुर, बलरामपुर, बेमेतरा, मुंगेली, कोंडागांव, गरियाबंद तथा बलोदाबाजार को अनुदान दिया जाना प्रस्तावित है ।
संग्रहालय -
अतीत के अवशेषों के संरक्षण, प्रदर्शन, अध्ययन तथा प्राचीन ज्ञान-विज्ञान के स्त्रोतों के अनुसंधान के लिए संग्रहालयों की महत्वपूर्ण भूमिका है । राज्य शासन के विभिन्न संग्रहालयों के उन्नयन तथा नवीन संग्रहालयों की स्थापना के लिए विशेष रुप से सवेष्ट है । रायपुर संग्रहालय का सौन्दर्यीकरण तथा प्रदर्शन को आधुनिक स्वरुप देने की कार्यवाही की जा रही है । बिलासपुर में विभाग द्वारा संचालित संग्रहालय हेतु विभागीय भूमि-भवन की व्यवस्था की जा रही है । इसी प्रकार जगलदपुर में संग्रहालय भवन का निर्माण कराया गया है, जिसमें शीघ्र ही प्रदर्शन की योजना है । कबीरधाम जिले में उत्खनित स्थल पचराही में संग्रहालय का उद्घाटन कर प्रदर्शन किया गया है तथा सिरपुर में संग्रहालय भवन का शिलान्यास कराया गया है । अन्य जिलों में भी भवन निर्माण, संकलन तथा प्रदर्शन की कार्यवाही की जा रही है । जनजातीय क्षेत्रों पर विशेष रुप से ध्यान केन्द्रित किया गया है ।
राजनांदगांव, रायगढ़ तथा कोरबा में जिला पुरातत्व संग्रहालयों का निर्माण कर उन्हें प्रदर्शन कर जनसामान्य के अवलोकन हेतु खोल दिया गया है । इसके अतिरिक्त पंचायत स्तर पर ग्राम पासिद, भोरमदेव तथा मठपुरैना में भी स्थानीय संग्रहालयों का निर्माण किया गया है । जिला-सरगुजा में स्थानीय संग्रहालय निर्माण की योजना पर कार्यवाही की जा रही है ।

रासायनिक संरक्षण
वित्तीय वर्ष 2012-13 में कुलेश्वर मंदिर राजिम के गर्भगृह एवं प्रतिमाओं का रसायनिक संरक्षण कार्य, भग्न मंदिर डमरु, जिला बलोदा बाजार तथा जिला पुरातत्व संग्रहालय जगदलपुर की पाषाण प्रतिमाओं का रसायनिक संरक्षण कार्य, विभागीय बजट के अन्तर्गत एवं चितावरी देवी मंदिर, धोबनी, जिला रायपुर, शिवमंदिर, पलारी, जिला दु्र्ग, शिवमंदिर, गनियारी, जिला बिलासपुर तथा मण्डवा महल, ग्राम चौरा, जिला कबीरधाम का रसायनिक संरक्षण कार्य 13वें वित्त आयोग के अन्तर्गत किया जाना प्रस्तावित है ।

ग्रंथालय -
संस्कृति विभाग के अंतर्गत संचालित 'महंत सर्वेश्वरदास पुस्तकालय' को राज्य केन्द्रीय ग्रंथालय का दर्जा दिया गया है । इसे ई-लाईब्रेरी के रुप में विकसित किया जा रहा है । इस क्रम में उन्नत एवं आधुनिक सुविधा के लिए 'लिबसिस सॉटवेयर' युक्त कम्प्युटरीकृत सुविधा शीघ्र आरंभ कराने की योजना है । पुस्तकालय में छत्तीसगढ़ राज्य से संबंधित जानकारी के लिए अलग कक्ष का निर्माण किए जाने की योजना है । इस ग्रंथालय में इतिहास, पुरातत्व, नृतत्व शास्त्र, लोक प्रशासन, हिन्दी साहित्य, पत्रकारिता, पर्यटन एवं कम्प्यूटर आदि के अतिरिक्त हिन्दी, अंग्रेजी तथा संस्कृत साहित्य से संबंधित ग्रंथ तथा गंजेटियर उपलब्ध हैं ग्रंथालय में प्रतियोगी परीक्षाओं के छात्र-छात्राओं के अध्ययन हेतु पृथक से अध्ययन कक्ष की सुविधा उपलब्ध कराई गई है । ग्रंथालय हेतु इस वर्ष इतिहास, पुरातत्व, नृतत्व शास्त्र, लोक प्रशासन, हिन्दी साहित्य, पत्रकारिता, पर्यटन एवं कम्प्यूटर पुस्तके क्रय की जावेगी ।

प्रकाशन -
विभागीय वार्षिक शोध पत्रिका कोसल अंक-5 का प्रकाशन किया गया है ।
बिहनिया अंक-10 का प्रकाशन किया गया है ।
महेशपुर की कला नामक पुस्तक का प्रकाशन किया गया है ।
द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी की प्रोसिडिंग्स का प्रकाशन किया जाना प्रस्तावित है ।
गणतंत्र दिवस, राज्योत्सव, आदि विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन पर ब्रोशर का प्रकाशन कराया गया ।
स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस, राज्योत्सव, राज्य दिवस, अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं स्वामी विवेकानंद के जीवन और मिशन पर केन्द्रित सांगीतिक प्रस्तुति आदि विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन पर आमंत्रण पत्र का प्रकाशन कराया गया ।
अभिलेखागार -
मध्यप्रदेश से अर्न्तराष्ट्रीय स्तर की विशेषतः छत्तीसगढ़ से सम्बधित सन् 1857 से 2000 के मध्य की ऐतिहासिक एवं महत्वपूर्ण (स्थायी प्रकृति के) शौध संदर्भो हेतु पुस्तकें-ग्रंथ, पत्रिकाएँ, रिपोर्ट गजट, नकशे इत्यादि को छत्तीसगढ़ अभिलेखागार को हस्तांरित किए जाने की मध्यप्रदेश प्रशासकीय स्तर से स्वीकृति प्रदान कर दी गई है । उनका अवलोकन, चयन तथा चिन्हाकित कर लगभग 5000 पुस्तकों को माह फरवरी-2013 में रायपुर लाया जाना सुनिश्चित कर लिया गया है । उसके पश्चात भी लगभग 1000 पुस्तकें और लायी जाना संभावित है ।
मध्यप्रदेश शासन मंत्रालय के अभिलेखागार से छत्तीसगढ़ से संबंधित सन् 1919 से 1950 के अभिलेखों की लगभग 10,000 डिजिटल इमेज में रायपुर लाये जाने की कार्रवाई की जा रही है ।
मध्यप्रदेश में संधारित अर्न्तराष्ट्रीय स्तर की विशेषतः छत्तीसगढ़ से सम्बधित सन् 1857 से 2000 के मध्य के ऐतिहासिक एवं महत्वपूर्ण (स्थायी प्रकृति के अभिलेखों की एक गाइड तैयार करने की भी योजना बनाई जा रही है ।
ऐतिहासिक अभिलेखों की राज्य स्तरीय प्रदर्शनियों की भी एक योजना पर विचार किया जा रहा है ।
वित्तीय वर्ष 2013-14 में नया रायपुर में राज्य अभिलेखागार-भवन का निर्माण आरंभ किए जाने की कार्रवाई की जा रही है ।
अभिलेखागार के माध्यम से, राष्ट्रीय पाण्डुलिपि मिशन भारत सरकार द्वारा प्रायोजित, Manuscript Resource Centre-MRC के तहत छत्तीसगढ़ की पाण्डुलिपियाँ का सर्वेक्षण कर उनका अभिलेखन किया जा रहा है । अब तक लगभग 9500 पाण्डुलिपियों दर्ज की जा चुकी हैं । Manuscript Conservation Centre-MCC के तहत पाण्डुलिपि संग्राहकों द्वारा उन्हें अपनी पाण्डुलिपियाँ सहेज तथा संरक्षित रखने हेतु संग्रह स्थानों पर ही उन्हे संरक्षण-परिरक्षण में प्रशिक्षित करने का प्रयास है । अभिलेखों तथा पाण्डुलिपियों को वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण-परिरक्षण करने हेतु विभागीय कर्मचारी को प्रशिक्षित किया जा रहा है ।

राजभाषा -
राज्य की संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु संस्कृति नीति के अनुरुप सांस्कृतिक गतिविधियों को आयाम प्रदान किया जा रहा है । इसके अंतर्गत छत्तीसगढ़ के विभिन्न समुदायों के सांस्कृतिक विकास के लिए कला एवं जीवन, मौखिक एवं लिखित परम्परा के बीच में अन्तर्सबंध की पहचान, उनके अभिलेखन, प्रदर्शन, प्रकाशन एवं प्रचार करने का प्रयास किया गया है तथा समुदायों के बीच प्रचलित संस्कृति को प्रोत्साहित करने एवं उसे विकसित करने में राज्य के संस्कृति विभाग द्वारा एक उत्प्रेरक की भूमिका का सफल निर्वहन किया जा रहा है । तद्नुसार विभागीय योजनान्तर्गत छत्तीसगढ़ अंचल के लोक पारंपरिक उत्सवों, साहित्यिक आयोजनों एवं संगोष्ठियों हेतु अर्थाभावग्रस्त लेखको, कलाकारों एवं उनके आश्रितों को वित्तीय सहायता योजना के अन्तर्गत वर्ष 2012-13 में 63 कलाकारों/साहित्यकारों को कुल रु. 11,34,000/- का भुगतान किया गया । छत्तीसगढ़ कलाकार कल्याण कोष द्वारा कलाकारों/साहित्यकारों को गंभीर बीमारी के उपचार हेतु सहायता दिये जाने का प्रावधान/योजना संचालित है ।

अशासकीय संस्थाओं को अनुदान वर्ष 2012-13 में कुल 31 लोगों को रु. 30,92,400/- का भुगतान तथा विभिन्न जिलों में सांस्कृतिक आयोजनों/महोत्सवों/मेलों हेतु कुल रु. 67,50,000/- का आबंटन कलेक्टरों को प्रदाय किया गया है ।

गजेटियर-
छत्तीसगढ़ जिला गजेटियर लेखन एवं प्रकाशन समिति के माध्यम से छत्तीसगढ़ के 27 जिलों के गजेटियर तैयार कराने के लिये कार्यवाही आरंभ की गई है । साथ ही मध्यप्रदेश में प्रकाशित छत्तीसगढ़ के पुराने जिला गजेटियरों को वेब पर अपलोड करने की कार्यवाही की जा रही है ।

मॉडलिंग-
वर्तमान में मॉडलिंग शाखा में गणेश, मंजुश्री, पद्मपाणी, महिषासुर मर्दिनी, नर्तक पुरुष, चंवरधारिणी नायिका, भू-स्पर्स बुद्ध मस्तक एवं अशोक वाटिका में सीता एवं हनुमान, प्रतीक्षारत नायिका, युगल प्रतिमा की प्रतिकृतियां लगभग 350 नग तैयार की जा चुकी हैं तथा 300 नग मार्च 2013 तक और निर्मित होने की संम्भावना है । इसके आलावा दो नग नवीन मोल्ड तैयार किया गया है ।
पुरावशेषों तथा प्रतिकृति निर्माण के प्रति जागरुकता विकसित करने की दृष्टि से कोपल वाणी चाइल्ड वेलफेयर आर्गनाइजेशन, सुंदर नगर, रायपुर में 15 दिवसीय कार्यशाला का आयोजन कर 40 प्रशिक्षुओं को प्लास्टर प्रतिकृति निर्माण में प्रशिक्षित किया गया एवं वर्तमान में प्रो. जे. एन. पाण्डे शासकीय विद्यालय में 15 दिवसीय प्लास्टर कास्ट प्रतिकृति निर्माण कार्यशाला में 60 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है । विभाग में उपलब्ध प्लास्टर कास्ट प्रतिमाओं तथा प्रकाशनों के विक्रय हेतु संग्रहालय परिसर में विक्रय केन्द्र का निर्माण कर विक्रय हेतु प्लास्टर प्रतिकृतियां व प्रकाशन उपलब्ध है ।

आर्ट गैलरी
महंत घासीदस स्मारक संग्रहालय परिसर स्थित आर्ट गैलरी में विभिन्न शासकीय, अर्द्दशासकीय एवं निजी संस्थाओं के माध्यम से कला सांस्कृतिक परंपराओं के प्रचार-प्रसार तथा मूल स्थान व निर्धारित स्थानों पर प्रदर्शनी की संकल्पना को क्रियान्वित करने हेतु राज्य की पंरपराओं तथा सांस्कृतिक कलात्मक संपदा का प्रदर्शन, जनजागरुता के उद्देश्य से कराया जाता है ।

छत्तीसगढ़ बहुआयामी संस्कृति संस्थान –
राज्य के विविध सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रदर्शन, विकास, प्रचार-प्रसार संकलन, कार्यशाला आदि के प्रत्यक्ष आयोजन से संबंधित संस्थान के विकास हेतु छत्तीसगढ़ बहुआयामी सांस्कृतिक संस्थान के गठन किया गया है । संस्थान में ख्यातिप्राप्त साहित्यकारों, कलाकारों की एक अंत: संकायी समिति होगी । साथ ही विविध कलाओं एवं संकाओं से चयनित उच्चस्तरीय विशेषज्ञ सम्मिलित होंगे । यह केन्द्र समुदायों के विशिष्ट सांस्कृतिक क्रियाकलापों को सर्वत्र प्रोत्साहित करेगा । इस योजना को साकार करने के उद्देश्य से आडिटोरियम, मुक्ताकाश मंच, आर्ट गैलरी आदि तैयारी किया जाना है । 'बहुआयामी संस्कृति संस्थान' के निर्माण हेतु इंदरा गांधी कृषि विश्व विद्यालय परिसर रायपुर में 10 एकड़ भूमि उपलब्ध हो चुकी है । इस सांस्कृतिक परिसर के निर्माण हेतु वास्तुविद से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर इससे संबंधित डी.पी.आर. लोक निर्माण विभाग रायपुर को अग्रिम कार्यवाही हेतु रु. 48.60 करोड़ का अनुमानिक प्रेषित किया गया था । लोक निर्माण विभाग द्वारा परीक्षण उपरान्त 48.26 करोड़ रुपये का संशोधित डी.पी.आर प्राप्त हो गया है जिसे स्वीकृति हेतु शीघ्र भेजा जा रहा है ।


लोकोत्सव व पारंपरिक मेलों का विकास-
राज्य की धरोहर, कला, संस्कृति एवं परंपरओं के प्रचार-प्रसार की दृष्टि से राजिम कुंभ, बस्तर दशहरा, शिवरीनारायण उत्सव, रायगढ़ में चक्रधर समारोह, सरगुजा में रामगढ़ उत्सव, बिलासपुर में बिलासा उत्सव, जांजगीर में जाज्वल्वदेव महोत्सव, सिरपुर में सिरपुर उत्सव, कांकेर में गढ़िया महोत्सव, करिया धुरवा मेला, रतनपुर उत्सव, मल्हार महोत्सव, खल्लारी महोत्सव, लोक मड़ई, डोंगरगढ़, भोरमदेव महोत्सव, ताला उत्सव आदि के आयोजन जिला प्रशासन व अन्य माध्यम से समन्वय कर संचालित किये जाते हैं ।

राज्योत्सव का आयोजन-
राज्य स्थापना दिवस 01 नवम्बर के अवसर पर राज्य के विभिन्न अंचल के स्थापित लोक कलाकारों, कला दलों के साथ-साथ नवोदित और अल्पज्ञात कलाकारों को प्रस्तुति हेतु अवसर उपलब्ध कराया गया । जिसमें राष्ट्रीय कलाकारों के साथ नये कलाकारों की पहचान, प्रोत्साहन एवं रचनात्मक स्वरुप की झलक प्रस्तुत हुई । राज्योत्सव के सात दिवसीय मुख्यसमारोह में प्रदेश के लोक कलाकारों के साथ-साथ देश के विभिन्न राज्यों के प्रतिष्ठित कलाकारों के द्वारा आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुति दी गई । छ्त्तीसगढ़ राज्य दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में 21 नवम्बर, 2012 को सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया ।

राजिम कुंभ-
राज्य के त्रिवेणी संगम राजिम जहाँ प्रतिवर्ष माघ पूर्णिमा को पारंपरिक रुप से मेले का आयोजन होता था, उसे नियमित स्वरुप प्रदान कर राजिम कुंभ मेला समिति गठित किया गया है । राज्य के संस्कृति के विकास एवं पर्यटन को प्रोत्साहन प्रदान करने हेतु राजिम में शंकराचार्य, महामंडलेश्वर, मठाधीश, संत-महात्माओं एवं जन प्रतिनिधियों के मार्गदर्शन में कुंभ मेले का आयोजन किया जाता है । इस अवसर पर देश के कोने-कोने से साधु-संतों का समागम राजिम में होता है । छत्तीसगढ़ का प्रयाग में इस आयोजन से संस्कृति, धरोहर, लोक परंपरा एवं कला को एक नया आयाम जुड़ा है । इस दौरान राष्ट्रीय स्तर व आंचलिक कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और साहित्यिक संगोष्ठी एवं विभागीय प्रदर्शनीय का आयोजन पूरे पंचकोशी क्षेत्र में किया जाता है ।

कला एवं संस्कृति-
प्रदेश की संस्कृति एवं साहित्य के संरक्षण व संवर्धन हेतु विभागीय नीति के अनुरुप कार्यक्रम तैयार कर गतिविधियों का संचालन विभाग द्वारा किया जाता है, जिससे समुदायों के बीच पारंपरिक संबन्धों को बनाये रखने में, उन्हें विकसित करने में, उनके जीवन, उनकी कलाओं को उत्प्रेरित किया जा सके । स्थानीय समुदायों की अबाध सांस्कृतिक परम्पराओं की पहचान, मान्यता देना, पुनर्जीवित करना, दस्तावेजीकरण, प्रस्तुति एवं उनका प्रचार-प्रसार किया जा रहा है । साथ ही छत्तीसगढ़ के अद्वितीय सांस्कृतिक वैविध्य एवं विशिष्ट पहचान को परिभाषित कर, उसके सीमावर्ती पड़ोसी राज्यों तथा सांस्कृतिक प्रदेशों के साथ संबंध व विनिमय स्थापित किया जा रहा है । राज्य की समृद्ध जनजातीय परंपरा के संरक्षण एवं परिवर्धन हेतु विभिन्न कार्यक्रम, जिसमें जनजातीय रहन-सहन, तौर तरीके, रीति-रिवाज, लोक नृत्य, गायन एवं अन्य परंपराओं को बनाये रखने हेतु भी कार्य किया गया है । इस हेतु विभागीय क्रियाकलाप के साथ-साथ साहित्य, संस्कृति और कला के क्षेत्र में कार्यरत स्वायत्तशासी एवं निजी क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाओं को आर्थिक सहायता दी गई है । विभाग के अन्तर्गत 'छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग', 'स्वामी विवेकानंद विश्व प्रबुद्ध संस्थान', 'पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी सृजन पीठ' एवं 'छत्तीसगढ़ सिंधी साहित्य संस्थान' गठित है, जिसके माध्यम से सांस्कृतिक एवं साहित्यिक गतिविधियों के विकास एवं संवर्धन की दिशा में हो रहे कार्यों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है ।

आयोजन एवं उत्सव -
राज्य, नयी संस्थाओं/उत्सवों को प्रस्थापित करने के बजाय अस्तित्वमान पृष्ठभूमि वाले उत्सवों/संस्थाओं को प्रोत्साहित करता है ताकि राज्य की पारंपरिक संस्कृति अविच्छिन्न बनी रहे और समाज-संस्कृति के विभिन्न क्षेत्रों में अंत:संकायी संवाद कायम रहे । इस तारतम्य में विभाग द्वारा निम्नलिखित कार्यक्रम आयोजित किये गए/सहयोग प्रदान किया गया -
छत्तीसगढ़ शासन संस्कृति विभाग के अंतर्गत लोकगीत नृत्य, गीष्मकालीन शिविर, हर-दिल-अजीज (मोहम्मद रफी के 31वीं पुण्यतिथि के अवसर पर), लोक स्वर जगार, कवि-दिवस, पावस प्रसंग, शाम-ए-मुकेश के गीतों के नाम, चक्रधर समारोह, स्पिक-मैके (छत्तीसगढ़ राज्य अधिवेशन), छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग-कहिनी अउ कविता सिविर (परसिक्छन), हिन्दी दिवस समारोह, स्वर-सजनी, "गीतों भरी एक शाम शम्मी कपूर के नाम" कार्यक्रम, पं. विष्णु कृष्ण जोशी जयंती समारोह, शास्त्रीय संगीत समारोह आदि का आयोजन संपन्न किया जा चुका है, जो भविष्य में भी निरन्तर जारी रहेगा ।
सफर मुक्ताकाश का आयोजन - राज्य की मंचीय प्रतिभाओं तथा चित्रकारों को नियमित अवसर प्रदान कर राजधानी में सुधि नागरिकों की रुचि और आग्रह के अनुरुप प्रत्येक माह के तीसरे शनिवार को आयोजित 'सफर मुक्ताकाश' के अंतर्गत अप्रैल 2012 से अब तक 10 नाटकों तथा लुप्तप्राय प्रमुख नाचा से संबंधित संस्कृति को जीवित रखने के उद्देश्य 10 से लोक संगीत/पंडवानी/नाचा गम्मत का आयोजन कराया गया है ।
अखिल भारतीय कवि सम्मेलन- राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त जयन्ती के अवसर पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन दिनांक 04 अगस्त 2012 से 07 अगस्त 2012 तक राज्य के चारो संभागों (रायपुर, बिलासपुर, सरगुजा एवं बस्तर) में आयोजित काया है ।
जगार महोत्सव में बहुरुपियों का मेला-
दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र नागपुर एवं संस्कृतिक विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के संयुक्त तत्वावधान में छत्तीसगढ़ में कला के प्रचार-प्रसार एवं जतन-संवर्द्धन में जनमानस का मनोरंजन तथा प्रबोधन संबंधी कार्यक्रम का आयोजन दुर्ग, धमतरी, महासमुंद, रायगढ़ एवं रायपुर में किया गया ।
विभाग के अंतर्गत स्थापित सम्मान-
पं. सुन्दरलाल शर्मा सम्मान (साहित्य/आंचलिक साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान हेतु राज्य स्तरीय सम्मान), इस वर्ष डॉ. परदेशीराम वर्मा, भिलाई, जिला दुर्ग को प्रदान किया गया ।
चक्रधर सम्मान (कला/शिल्प कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान हेतु राज्य स्तरीय सम्मान), श्री कुंजबिहारी अग्रवाल, रायपुर को प्रदान किया गया ।.
दाऊ मंदराजी सम्मान (लोक कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान हेतु राज्य स्तरीय सम्मान), इस वर्ष श्रीमती ममता (मोक्षदा) चन्द्राकर, रायपुर को प्रदान किया गया ।
छत्तीसगढ़ अप्रवासी भारतीय सम्मान (विदेश में रहकर देश व राज्य का प्रोत्साहन करने हेतु अंतरराष्ट्रीय सम्मान) इस वर्ष डॉ. श्याम नारायण शुक्ल को प्रदान किया गया ।
माता कौशिल्या सम्मान- महिला उत्थान के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिये माता कौशिल्या सम्मान स्थापित किया गया है । उक्त सम्मान संस्कृति विभाग द्वारा इसी वर्ष से राजिम कुंभ के अवसर पर प्रदान किया जायेगा ।
इसके अतिरिक्त अन्य विभागों द्वारा दिए जाने वाले सम्मानों के सम्मान समारोह का समन्वय एवं अलंकरण समारोह संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित किया गया ।
संगोष्ठी एवं प्रदर्शनी -
संस्कृति विभाग के अंतर्गत सांस्कृति परंपराओं के प्रचार-प्रसार तथा मूल स्थान व निर्धारित स्थानों पर प्रदर्शनों की संकल्पना को क्रियान्वित करने हेतु राज्य की परंपराओं तथा सांस्कृतिक व कलात्मक संपदा का निम्नानुसार प्रदर्शन जनजागरूकता के उद्देश्य से किया गया / कराया जा रहा है -
दिनांक 12-13 जनवरी 2013 को महंत घासीदास संग्रहालय परिसर, रायपुर में दो द्विदिवसीय राष्ट्रीय पुरातत्व संगोष्ठी का आयोजन एवं छाया-चित्रों की प्रदर्शनीय का आयोजन किया गया हैं ।

लोक शिल्पियों की कार्यशाला सह प्रशिक्षण 'आकार'-
रायपुर में 23 अप्रैल से 13 मई 2012 तक 'आकार 2012' प्रशिक्षण शिविर के अंतर्गत पारम्परिक ढोकरा शिल्प, मृदा शिल्प, म्यूरल आर्ट, पेंटिंग, ड्राई फ्लावर, पट चित्र, मधुबनी, क्ले आर्ट, रजवार, जूट शिल्प, बोनसाई, फड़ पेन्टिंग तथा नाट्य प्रशिक्षण के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शिल्प गुरुओं द्वारा बड़ी संख्या में प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण दिया गया । रायपुर के साथ-साथ बिलासपुर में मई 2012 में 12 दिवसीय, कोरबा में मई 2012 में 10 दिवसीय, अम्बिकापुर में मई 2012 में 10 दिवसीय एवं जगदलपुर में मई 2012 में 12 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया । इन शिविरों में शास्त्रीय नृत्यों का प्रशिक्षण भी दिया गया ।


विभाग के अधीनस्थ गठित इकाईयां

छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग, रायपुर -
छत्तीसगढ़ी को राज्य की राजभाषा का दर्जा प्रदान कर छत्तीसगढ़ी के प्रचलन, विकास एवं राजकीय कार्यों में उपयोग हेतु समस्त उपाय करने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा 'छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग' की स्थापना की गई है, जो राज्य की प्रमुख उपलब्धियों में सम्मिलित है छत्तीसगढ़ी और सरगुजिया के बीच अंतर संबंध विषय पर अंबिकापुर में संगोष्ठी का आयोजन किया गया । इसी प्रकार 'माई कोठी' योजना के अन्तर्गत छत्तीसगढ़ एवं छत्तीसगढ़ी में लिखे साहित्य का संकलन किया जा रहा है । राजभाषा आयोग द्वारा बहुभाषीय छत्तीसगढ़ी शब्दकोश भाग-1 एवं भाग-2 का भी प्रकाशन कराया गया है ।

विवेकानन्द विश्व प्रबुद्ध संस्थान, रायपुर -
स्वामी विवेकानन्दजी ने कोलकाता के पश्चात् अपने जीवन का सर्वाधिक समय रायपुर में व्यतीत किया । उनके जीवन काल को स्मरणीय बनाने हेतु शासन द्वारा विवेकानन्द प्रबुद्ध विश्व संस्थान की स्थापना की गई है, जिसके अंतर्गत स्वामी जी के विचारों के अनुकूल अंतर्राष्ट्रीय संबंध भारत दर्शन, प्रबंधशास्त्र, युवा कल्याण एवं ग्रामीण विकास जैसे विषयों पर अध्ययन एवं शोध कार्य संचालित किए जायेंगे । इस दिशा में कार्यवाही की जा रही है ।



पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी सृजनपीठ, भिलाई -

छत्तीसगढ़ शासन, संस्कृति विभाग के अंतर्गत डॉ. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी जी की पावन स्मृति में साहित्यिक संस्था सृजनपीठ कार्यरत है । इस संस्थान ने अपनी राष्ट्रीय गतिविधियों से अब पूरे देशभर के साहित्यकारों में अपनी पहचान और सम्मान जनक स्थान बना लिया है ।

दिनांक 3 अप्रैल 2011 को पं. माखनलाल चतुर्वेदी जयंती के पूर्व दिवस पर आयोजित व्याख्यान आयोजित की गई । दिनांक 27 मई 2011 को बख्शी जंयती समारोह के उपलक्ष्य में डॉ. महेश शर्मा की कृति पर परिचर्चा गोष्ठी आयोजित कि गई । दिनांक 14 सितम्बर 2011 को हिन्दी दिवस समारोह एवं 'सृजन' पत्रिका का विमोचन किया गया । दिनांक 28 दिसम्बर 2011 को डॉ. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी जी की जयन्ती के अवसर पर गोष्ठी का आयोजन किया गया । दिनांक 23 जनवरी 2012 को 'बस्तर भूषण'- पं. केदारनाथ ठाकुर स्मृति समारोह का आयोजन किया गया ।

छत्तीसगढ़ सिन्धी साहित्य संस्थान -
छत्तीसगढ़ शासन, संस्कृति विभाग द्वारा संचालित छत्तीसगढ़ सिन्धी साहित्य संस्थान द्वारा अब तक कुल 35 गतिविधियों/कार्यक्रमों का आयोजन किया जा चुका है । संस्थान द्वारा बच्चों को सिंधी भाषा की शिक्षा देने हेतु रायपुर के विभिन्न सिंधी बाहुल्य क्षेत्रों में तीन केन्द्र, वहां की पूज्य सिंधी पंचायतों के सहयोग से संचालित हैं । संस्थान द्वारा सिंधी भाषा एवं संस्कृति के उत्थान हेतु विभिन्न क्रियाकलाप समय-समय पर शासन के सहयोग से संचालित किए जाते रहे हैं ।

दक्षिण-मध्य-क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र की सदस्यता- विभाग द्वारा पड़ोसी राज्य से सांस्कृतिक संबंध विकसित करने एवं राज्य के कलाकारों को राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्ष 2005 से दक्षिण-मध्य-क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र नागपुर की सदस्यता ग्रहण कर नियमित रुप से कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं । इसी प्रकार संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली तथा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, नई दिल्ली के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम, अभिलेखन, कार्यशाला का आयोजन किया गया है ।





संचालनालय संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग,रायपुर के विभागाध्यक्ष तथा मैदानी कार्यलयों की स्वकृत पद संरचना 2012-13
सं.क्र. पदनाम वेतनमान स्वीकृत पद भरे पद रिक्त पद
1 2 3 4 5 6
1 संचालक अखिल भारतीय सेवा 1 पद 1 --
2 संयुक्त संचालक 15600-39100+6600 2 पद -- 2
3 उप संचालक 15600-39100+6600 4 पद 2 2
योग :- 7 पद 03 04
प्रशासन, बजट योजना एवं लेखा
4 उप संचालक (वित्त) 15600-39100+6600 1 पद 1 --
5 कनिष्ट लेखाधिकारी 9300-34800+4200 1 पद -- 1
6 अधीक्षक 9300-34800+4300 1 पद 1 --
7 सहायक अधीक्षक 9300-34800+4200 1 पद 1 --
8 सहायक वर्ग 1 5200-20200+2800 1 पद 1 --
9 सहायक वर्ग 2 5200-20200+2400 4 पद 4 --
10 सहायक वर्ग 3 5200-20200+1900 6 पद 5 1
11 स्टेनोग्राफर-3 5200-20200+2800 3 पद 2 1
12 स्टेनो टायपिस्ट 5200-20200+1900 5 पद 5 --
13 डाटा एन्ट्री ऑपरेटर 5200-20200+2400 1 पद 1 --
14 प्रकाशन अधिकारी 9300-34800+5400 1 पद -- 1
15 तकनीकी सहायक 5200-20200+2800 2 पद 2 --
16 वीडियोग्राफर/छायाचित्रकार 5200-20200+2800 1 पद 1 --
17 वाहन चालक 5200-20200+1900 3 पद 3 --
18 भृत्य 4750-7440+1300 6 पद 3 3
19 चौकीदार जिलाध्यक्ष दर 1 पद -- 1
20 अंशकालिक फर्राश जिलाध्यक्ष दर 1 पद -- 1
योग :- 39 पद 30 पद 09
पुरातत्व, संग्रहालय एवं ग्रंथालय
21 मुद्राशास्त्री 15600-39100+6600
1 पद -- 1
22 पुरालेखवेत्ता 15600-39100+5400 1 पद -- 1
23 ग्रंथपाल 15600-39100+5400 1 पद 1 --
24 सहायक ग्रंथपाल 9300-34800 1 पद -- 1
25 सहायक उद्यान विकास अधिकारी 9300-34800+4200 1 पद -- 1
26 उप अभियन्ता 9300-34800+4200 1 पद -- 1
27 सहायक प्रोग्रामर 9300-34800+4300 1 पद 1 --
28 स्वागतकर्ता 5200-20200+2800 2 पद 1 1
29 डाटा एंट्री ऑपरेटर 5200-20200+2400 1 पद 1 --
30 सहायक वर्ग-3 5200-20200+1900 2 पद 1 1
31 भृत्य 4750-7440+1300 4 पद 4 पद --
योग :- 16 पद 09 पद 07 पद
अभिलेखागार
32 उप संचालक 15600-39100+6600 1 पद 1 --
33 पुरालेख अधिकारी 15600-39100+5400 1 पद -- 1
34 संरक्षण अधिकारी 9300-34800+4400 1 पद -- 1
35 सहा. पुरा. अधि. 9300-34800+4300 1 पद 1 --
36 सहायक ग्रंथपाल 9300-34800+4200 1 पद 1 --
37 सहा. पुरालेखपाल 5200-20200+2800 1 पद -- 1
38 सहायक वर्ग-2 5200-20200+2400 1 पद 1 --
39 डाटा एन्ट्री ऑपरेटर 5200-20200+2400 1 पद 1 --
40 बाईन्डर 5200-20200+1900 1 पद 1 --
41 भृत्य 4750-7440+1300 2 पद 1 1
योग :- 11 पद 07 पद 04 पद
उत्खनन, मॉडलिंग, रसायन
42 सहायक यंत्री 15600-39100+5400 1 पद -- 1
43 मुख्य रसायनज्ञ 15600-39100+5400 1 पद 1 --
44 पुरातत्वीय अधिकारी 15600-39100+5400 1 पद 1 0
45 पुरातत्ववेत्ता 15600-39100+5400 2 पद -- 2
46 उपयंत्री 9300-34800+4200 3 पद 3 --
47 मानचित्रकार 9300-34800+4200 2 पद 2 --
48 कलाकार 9300-34800+4200 2 पद 2 --
49 रसायनज्ञ 9300-34800+4200 2 पद 1 1
50 सहायक कलाकार 5200-20200+2800 2 पद 1 1
51 सहायक रसायनज्ञ 5200-20200+2800 2 पद 1 1
52 उत्खनन सहायक 5200-20200+2800 3 पद 3 --
53 पर्यवेक्षक 5200-20200+4300 1 पद 1 --
54 सर्वेयर 5200-20200+2400 3 पद 2 1
55 सहायक वर्ग-2 5200-20200+2400 3 पद 1 2
56 सहायक वर्ग-3 5200-20200+1900 3 पद 2 1
57 मोल्डर/सेल्समेन 5200-20200+1900 2 पद 2 --
58 डाटा एन्ट्री ऑपरेटर 5200-20200+2400 1 पद 1 --
59 भृत्य 4750-7440 5 पद -- 5
योग :- 39 पद 24 पद 15 पद
राजभाषा, संस्कृति एवं गजेटियर
60 उप संचालक 15600-39100+6600 1 पद 1 --
61 सहायक संचालक 9300-34800+5400 1 पद -- 1
62 सहायक संचालक 9300-34800+4400 1 पद 1 --
63 अनुदेशक 9300-34800+4300 2 पद 1 1
64 शोध सहायक 9300-34800+4300 2 पद 2 --
65 अनुवादक 5200-20200+2800 2 पद 2 --
66 सहायक वर्ग-2 5200-20200+2400 1 पद 1 --
67 सहायक वर्ग-3 5200-20200+1900 3 पद -- 3
68 डाटा एन्ट्री ऑपरेटर 5200-20200+2400 1 पद 1 --
69 भृत्य 4750-7440+1300 2 पद 1 1
योग :- 16 पद 10 पद 06 पद
कार्यालय संग्रहाध्यक्ष जिला पुरातत्व संग्रहालय, (रायपुर, बिलासपुर, जगदलपुर, राजनांदगांव, रायगढ़, जांजगीर-चांपा, अंबिकापुर)
70 संग्रहाध्यक्ष 15600-39100+5400 7 पद 2 5
71 वरिष्ठ मार्गदर्शक 9300-34800+4300 3 पद 1 2
72 कनिष्ठ मार्गदर्शक 5200-20200+2800
4 पद 3 1
73 सहायक ग्रेड-2 5200-20200+2400
7 पद 7 --
74 सहायक ग्रेड-3 5200-20200+1900
7 पद 6 1
75 डाटा एन्ट्री ऑपरेटर 5200-20200+2400
3 पद 3 --
76 भृत्य 4750-7440+1300 10 पद 5 5
77 चौकिदार 4750-7440+1300 11 पद 2 9
78 केयर टेकर (संग्रहालय गैलरी) 4750-7440+1300 4 पद -- 4
79 केयर टेकर जिलाध्यक्ष दर 12 पद 12 --
80 फर्राश/स्वीपर अंशकालीन जिलाध्यक्ष दर 4 पद -- 4
योग :- 72 पद 41 पद 31 पद
महायोग :- 200 पद 124 पद 76 पद
स्वीकृत सांख्येतर पदों की जानकारी
81 केयर टेकर 4750-7440+1300 09 पद 09 --
82 स्वीपर 4750-7440+1300 01 पद 01 --
83 केयर टेकर (नैमित्तिक) 4750-7440+1300 06 पद 03 3
84 उद्यान रेजा 4750-7440+1300 03 पद 02 1
85 उद्यान मजदूर 4750-7440+1300 02 पद 01 1
86 भृत्य 4750-7440+1300 01 पद 01 --
87 चौकिदार 4750-7440+1300 01 पद 01 --
योग :- 23 पद
18 पद 05 पद
छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग
88 अध्यक्ष 25000 प्र.मा. 01 पद 1 --
89 सदस्य 18000 प्र.मा. 02 पद 2 --
90 सचिव 37400-67000+8900 01 पद 1 --
91 उप सचिव 15600-39100+7600 01 पद -- 1
92 लेखाधिकारी सह प्रशासनिक अधिकारी 15600-39100+5400 01 पद -- 1
93 सहायक संचालक 15600-39100+5400 01 पद -- 1 (प्रति.)
94 हिन्दी/छत्तीसगढ़ी अनुवादक 9300-34800+4300 01 पद -- 1
95 अधीक्षक 9300-34800+4200 01 पद -- 1
96 सहायक ग्रेड-1 5200-20200+2800 01 पद -- 1
97 सहायक ग्रेड-2 5200-20200+2400 02 पद -- 2
98 स्टेनोग्राफर 5200-20200+2800 02 पद -- 2
99 कम्प्यूटर ऑपरेटर 8000 संविदा 01 पद 1 --
100 वाहन चालक 5200-20200+1900 02 पद 2 --
101 भृत्य 4750-7440+1300 02 पद 2 --
102 स्वीपर अंशकालीन 01 पद -- 1
योग :- 20 पद 09 11

संचालनाय संस्कृति एवं पुरातत्व बजट प्रावधान की जानकारी वित्तीय वर्ष 2012-13
क्र. बजट का मद आयोजनेत्तर आयोजना योग
1 2 3 4 5
मांग संख्या 26 लेखा शीर्ष 2202 सामान्य शिक्षा
1 102 आधुनिक भारतीय भाषाओं और साहित्य का संवर्धन 63.34 85.89 149.23
योग 2202 63.34 85.89 149.23
मांग संख्या 26 लेखा शीर्ष 2205 कला और संस्कृति
1 101 – ललित कलाओं की शिक्षा 2.60 0.10 2.70
2 102 – कलाओं एवं संस्कृति का संवर्धन 312.00 0.00 312.00
3 103 – पुरातत्व 314.35 234.00 548.35
4 104 – अभिलेखागार 33.09 0.00 33.09
5 105 – सार्वजनिक पुस्तकालय 0.00 30.00 30.00
6 107 – संग्रहालय 241.51 0.00 241.51
7 800 – अन्य व्यय 1.10 356.00 357.10
योग 2205 904.65 620.10 1524.75
मांग संख्या 26 लेखा शीर्ष 3454 जनगणना सर्वेक्षण एवं साख्यिकी
1 110 – गजेटियार और सांख्यिकी विवरण 0.00 14.65 14.65
योग 3454 0.00 14.65 14.65
967.99 720.64 1688.63
मांग संख्या 41 लेखा शीर्ष 2205 कला और संस्कृति
1 107 – संग्रहालय 0.00 330.00 330.00
योग मांग संख्या 41 0.00 330.00 330.00
मांग संख्या 48 लेखा शीर्ष 2205 कला और संस्कृति, 4202 – शिक्षा, खेल, कला और संस्कृति पर पूंजी परिव्यय (तेरहवें वित्त अयोग की अनुशंसा के अंतर्गत प्राप्त सहायता अनुदान)
1 2205 – 103 – पुरातत्व 0.00 455.00 455.00
2 4202 – 106 – संग्रहालय 0.00 670.00 670.00
योग मांग संख्या 48 0.00 1125.00 1125.00